मेरे दिल को हलाक कर डाला, देखो सीना भी चाक कर डाला, मुख़्तसर सा है मेरा अफ़साना, रस्मे उल्फ़त को ख़ाक कर डाला.. उर्मिला माधव.. 28.5.2013
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