मर्तबा इंसाँ है मेरा और आदम ज़ात हूँ,
अपनी हस्ती से हूँ ज़िन्दा अपनी ख़ुद औक़ात हूँ,
ना ग़ुरूर-ए-हुस्न हूँ,ना दुख़्तर-ए-जज़्बात हूँ
इब्तेदा से इन्तेहा तक क़िस्सा-ए-हालात हूँ..... Urmila Madhav
22.3.2013
Sunday, 31 March 2019
जज़्बात हूं
Saturday, 30 March 2019
दुखाने के लिए
दे दिया है दिल तुम्हें हरदम दुखाने के लिए,
पर इजाज़त दी नहीं है..लौट जाने के लिए .....
उर्मिला माधव...
31.3.2014....
जागीर ले ली है?
उलाहना दे रहे हो,यार तुम तो हद करो हो,बस,
मुहब्बत हो गई तुमसे तो क्या जागीर ले ली है?
::
Ulahan'a de rah'e ho yaar tum to had karo ho bas,
Muhabbat ho gai'i tums'e to kya jaagiir le lii hai ?
Urmila Madhav....
31.3.2016
सुखन ज़िंदा नहीं रहता
Hasad ke baar se dab kar koi shayar nahi uttha,
Ye aisi aag hai,jis-se sukhan zinda nahin rahtaa..
::
हसद के बार से दब कर कोई शायर नहीं उट्ठा,
ये ऐसी आग है जिससे,सुखन ज़िंदा नहीं रहता,.....
Urmila Madhav..
31.3.2016
करते भी क्या
एकतरफ़ा प्यार का करते भी क्या,
बे-वफ़ा के नाम पे ...मरते भी क्या?
हम ..जमा ख़ाते में रख्खे थे अबस,
मुफ़्त झूठी आह तब भरते भी क्या..
उर्मिला माधव..
31.3.2017
Friday, 29 March 2019
उतारा जाएगा
एक क़ता------
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आख़िरश ये जिस्म भी कितना सँवारा जाएगा,
और कहाँ तक इसको शीशे में उतारा जाएगा,
इसकी हस्ती कुछ नहीं .बस इन्तिहाई ख़ाक है,
एक दिन काँधों पै रख कर ये ख़ुदारा...जाएगा'
उर्मिला माधव...
30.3.2015
छोड़ दी
एक शेर....
बारहा उसने उड़ाया जब मुहब्बत का मज़ाक़,
बस तवक़्क़ो उसकी जानिब उम्र भर को छोड़ दी...
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Baarh'a usne uday'a jab muhabbat ka mazaq,
Bas tavaqqo uski janib umr bhar ko chhod di'i
Urmila Madhav..
30.3.2016
ज़िक्र
मजलूम के दिल की तड़पन को एक बार कभी तो जाके सुनो,
वो ख़ुदकुश है,ख़ुद मैय्यत है, ख़ुद ज़िक्र नहीं करता है बस..
Majloom ke dil ki tadpan ko,ek baar kabhi to jaake suno,
wo khudkash hai,khud maiyyat hai,khud zikr nahin bas karta hai..
उर्मिला माधव...
30.3.2016
चलती है
Zindagi ......roz rang badalti hai,
Chalne waale ke sath chalti hai,
::
ज़िंदगी ...रोज़ रंग बदलती है,
चलने वाले के साथ चलती है...
उर्मिला माधव,
30.3.2017
Thursday, 28 March 2019
आज़माता ही रहे
कब तलक कोई किसीको आज़माता ही रहे??
मोल अपनी चाहतों का ..क्यूँ चुकाता ही रहे ??
अपनी दुनिया भूलके दिल बेवज्ह सजदे करे,
क्यूँ किसी रस्ते में कोई ..सर झुकाता ही रहे ??
उर्मिला माधव...
2.12.2016
दे दी है
उस को उल्फ़त में ज़रा एक सदा देदी है,
हम ने ख़ुद आप ही रँजिश को हवा देदी है।।..
उर्मिला माधव..
28.3.2013
किनारा करलें
दिल ये कहता है तेरे ग़म से किनारा करलें,
ज़िन्दा रहना है तो ये ख़ुद से इज़ारा करलें,
वो जो उम्मीद तेरे दिल से हुआ करती थी,
ऐसी उम्मीद न अब कोई दोबारा करलें।।....उर्मिला माधव..
28.3.2013
निभाते हैं
रोज़ लिखते हैं और मिटाते हैं,
क्यूँ....कलम लेके बैठ जाते हैं??
पूरी शिद्दत से.....यूँ निभाते हैं,
रोटियाँ जैसे....इसकी खाते हैं....
उर्मिला माधव...
28.3.2014...
Hamaari hai
Aaj kii raat kitnii bhaarii hai
Sirf ye baith kar guzaari hai
Niind aatii hai par nahin aatii
Aankh bojhil bahut hamaari hai
Urmila Madhav...
28.3.2014..
Wednesday, 27 March 2019
भुरभुरे से हैं
वो जो खुर्रांट खुरखुरे से हैं,
बलुआ मिटटी हैं,भुरभुरे से हैं,
जो भी चाहे वो पीस के रखदे,
छू के देखो तो कुरकुरे से हैं,
उर्मिला माधव...
28.3.2014...
सनम
:) :) :)
अब मोबाइल का ...ज़माना है सनम,
जाने-आने का भला फिर क्या है ग़म,
पार सागर के पड़ेगी .....कॉल मंहगी
वाट्स ऐप पे ..चैट होगी कम से कम...
उर्मिला माधव...
28.3.2016
नहीं जाते
पहले आते थे .अश्क़ आंखों में,
अब ..किसी बात पर नहीं आते,
जो भी करना था तूने कर डाला,
अब तिरी ज़ात पर ...नहीं जाते..
उर्मिला माधव
28.3.2018
मालूम रखना है
हसद का और लहद का फ़र्क़ भी मालूम रखना है,
हसद में जलके रहते हैं.....लहद में दब के रहते हैं..
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Hasad ka or lahad ka farq bhi maaloom rakhna hai,n,
Hasad men jalke rahte hain,lahad men dab ke rahte hain.
उर्मिला माधव,
28.3.2017
ज़लज़लों में थे
जब हमें आप की ज़रूरत थी,
आप दुनियाँ के ज़लज़लों में थे,
आपको हम दिखाई देते क्यों,
आप यारों के वलवलों में थे,
उर्मिला माधव
Tuesday, 26 March 2019
दुआ करते थे
तुझसे मिलने की दुआ करते थे,
हम कभी ऐसे हुआ करते थे,
किस क़दर दिल ये तड़प उठता था,
जब कभी तुझको छुआ करते थे.......
उर्मिला माधव..
27.3.2013
लगती। है
सबकी तक़दीर सितारों से जड़ी लगती है,
अपनी सुनसान चनारों में पड़ी लगती है.......
उर्मिला माधव..
27.3.2013
ख़ास होते हैं
लोग कुछ यूँ भी ख़ास होते हैं,
वक़्त पर ग़म शनास होते हैं,
उनसे उम्मीद क्या करे कोई,
जो महज़ ख़ुद के पास होते हैं....
उर्मिला माधव...
27.3.2016
Monday, 25 March 2019
बारहा मक्कार हैं
कल तलक हम सोचते थे हम बहुत बदकार हैं,
और मुहब्बत के जहाँ में......बारहा मक्कार हैं,
पर ज़रा जब गौर से देखा....तो ये आया नज़र,
एक से बढ़कर एक हैं,हम बे-वजह ग़मख़्वार हैं...
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kal talak ham sochte the,ham bahut badkaar hain,
or muhabbat ke jahan main baaraha makkar hain,
par zaraa jab gaur se dekha..........to ye aaya nazar,
ek se badhkar ek hain,ham be-vajh gamkhwaar hain
#उर्मिला माधव...१४.१२.२०१३..
बतलाइये
कौन इसकी फ़िक्र करता है भला बतलाइये,
गोकि मेरे दर तलक भी आइये, .मत आइये,
इक वफ़ा के रंग-ओ-बू से आप हैं खाली अगर,
क्या-म-आनी हैं लहू से रंग के भी ख़त लाइए....
उर्मिला माधव ....
26.3.2015...
Sunday, 24 March 2019
मुश्किल हुआ
अपनी दुनियाँ में पलट कर देखना मुश्किल हुआ,
देखते ही रह गए यूँ क़िस्सा-ए-बिस्मिल हुआ!!
दिल की दुनियाँ आज तक भी जैसी थी वैसी रही,
जो भी रोना पीटना था बेवजह बिलकुल हुआ।। उर्मिला माधव.
25.3.2013
गुज़ारिश
ग़म गुज़ारिश की तरह से आगये,
ज़ख्म खारिश की तरह से आगये.
फैसला करने की कूव्वत थी किसे,
अश्क़ बारिश की तरह से आगये,
उर्मिला माधव...
25.3.2016...
Friday, 22 March 2019
रस्ता बचा रखना
अगर ग़लती ही करनी है करो,आज़ाद हो,लेकिन,
पलट कर लौट आने का कोई रस्ता बचा रखना।।।
Agar galati hi karni hai karo,aazaad ho,lekin,
Palat kar laut aane ka koii rastaa bachaa rakhna..
Urmila Madhav
23.3.2016
किन्नरों के वेश में
ये सभी प्राणी......अनेकों देश में,
जी रहे हैं.......किन्नरों के वेश में,
नाचते गाते हैं.......औरों के लिए,
जो स्वयं रहते कठिन परिवेश में....
उर्मिला माधव...
23.3.2014....
सब्र देख
आज भी तू हार को और जीत को रोता है बस?
इससे भी थोड़ा सा ऊपर उठ ज़रा ऑ सब्र देख..
उर्मिला माधव
23.3.2018
Thursday, 21 March 2019
नहीं हुआ
फिरते रहे हैं आपकी दुनियां में दर -ब-दर,
छोटा सा आशियाँ भी, मयस्सर नहीं हुआ..
उर्मिला माधव..
22.3.2017
हो गए
अच्छा हुआ कि हमको......तर्जुबात हो गए,
वरना गधों की शक्ल में क्या-क्या न पूछते...
उर्मिला माधव...
21.3.2014...
आदमी
जिंदा जला रहा है कोई ज़िन्दगी मगर,
मुर्दे में खोजता है तिलिस्मात आदमी.....
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zinda jalaa rahaa hai koii zindagi magar,
murde main khojtaa hai,tilismaat aadmii....
#urmilamadhvav
21.3.2015...
Monday, 18 March 2019
उदास लगता है
ग़मज़दा हूँ,... ये सच नहीं है पर,
कुछ तो है,दिल उदास लगता है....
उर्मिला माधव.....
19.3.2015
Sunday, 17 March 2019
होते हैं
दुनिया के कुछ ऐसे ग़म भी हमको सहने होते हैं,
मर जाते हैं फिर भी हमको कहीं न कहने होते हैं,
उर्मिला माधव
18.3.2019
घिरे पाए गए
हमने अपनी खूबियां भी तौल दीं मीज़ान पर,
जब हज़ारों रंजिशों से ....हम घिरे पाये गए,....
#उर्मिलामाधव...
18.3.2015..
Saturday, 16 March 2019
कुंडलिया छंद
कुण्डलिया छंद ---पहली कोशिश...
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क्या मतलब है आपका,जब देखो तब मांग,
विश्वनाथ सोये हुए.......पीकर अपनी भांग...
पीकर अपनी भांग उन्हें भी......चैन चाहिए,
अपनी झोली लिए हुए.......सब लौट जाइए...
जब होगा संग्राम वोट का....आना फिर सब,
समय पूर्व ही किसी बात का है क्या मतलब.....
उर्मिला माधव...
17.3.2014..
Friday, 15 March 2019
वर्जनाएं
जब कभी .....लांघी गई हैं वर्जनाएं,
तब सदा .....आहत हुई हैं भावनाएं,
क्या परिधियां अर्थ अपने खो चुकीं?
बच रही बस ......चीत्कारें,गर्जनाएं...
उर्मिला माधव...
18.6.2016..
खटकने लगता है
जब रात बहुत गहराती है,तब दर्द खटकने लगता है,
आँखों में नींद के आने का अन्दाज़ भटकने लगता ह,
यादों के बिखरे खण्डहर में एक आह सुनाई देती है,
दीवार में तेरे साये का कोई अक्स चटकने लगता ह।।
उर्मिला माधव..
16.3.2013
सामान भी हुए हैं
हम ज़िन्दगी पे अब तक क़ुर्बान ही हुए हैं,
वा-बस्तगी से दिल की हैरान ही हुए हैं!!
अपनी बुलन्दियों पे क़ायम है आज भी हम,
रुसवाइयों के कितने सामान भी हुए हैं.!
उर्मिला माधव..
16.3.2013
पंछी डाल पर
एक बहुत शैतान पंछी डाल पर,
जाने कब आया,गया जाना नहीं,
जब उड़ाया हमने उसको डाल से,
जम गया आकर वहीं माना नहीं,
हंस गया वो ज़ोर से,कहने लगा,
आपसे माँगा है क्या खाना,नहीं,
आप शायद इसलिए अनजान हैं,
सुन सके शायद मेरा गाना,नहीं?
मैं यहाँ हूँ जब तलक है दिल मेरा,
चल दिया तो मुड़ यहाँ आना नहीं,
उर्मिला माधव...
16.3.2014...
पानी पानी हो गया
जब से उसने छू दिया सागर की छोटी बूंद को,
बस उसी दम दिल हमारा पानी-पानी हो गया....
#उर्मिलामाधव....
16.3.2015....
ज़िन्दगी
भीड़ में चलते हुए तनहा रही है ज़िन्दगी,
क्या बताएं कब कहाँ,क्या क्या रही है ज़िन्दगी,
जाने कितनी मुश्किलों से,रु-ब-होते रहे,
थक गए हैं अब क़दम,घबरा रही है ज़िन्दगी,
एक मिटटी का दिया तूफ़ान से लड़ता रहा,
बेखबर था क़ह्र से टकरा रही है जिन्दगीं,
ये कभी ख्वाहिश न थी के भीड़ मेरे साथ हो,
क्यूँ भला माज़ी को फिर दोहरा रही है ज़िन्दगी,
दो क़दम आगे चले और एड़ियां कटने लगीं,
इसके मानी,ज़िन्दगी को खा रही है ज़िन्दगी,
भीड़ से तो बच गए अब क़ब्र ऑ तन्हाई है,
ज़िंदगी को बे-वफ़ा ठहरा रही है ज़िन्दगी...
उर्मिला माधव,
16.3.2016
लफ़्ज़
मैंने इक ही लफ्ज़ सीखा ज़िन्दगी से,
गो कि इसको सब्र ही कहते हैं शायद..
Maine ik hi lafz seekha zindagi se,
Go ki isko sabr hi kahte hain shayad...
उर्मिला माधव
16.3.2018
Thursday, 14 March 2019
जिनका
एक नया ....रोज़ प्यार है जिनका,
आशिक़ी .......रोज़गार है उनका,
हमने .....उनसे भी लड़ते देखा है.
जिन पे ...दार-ओ-मदार है इनका
उर्मिला माधव...
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ek nayaa .......roz pyar hai jinka,
aashiqi ...........rozgaar hai unka,
maine unse bhi ladte dekha hai,
jin pe ...daar-o-madaar hai inka....
Urmila Madhav...
15.3.2016
Wednesday, 13 March 2019
साहिल नहीं होता
कोई इश्क-ओ-मुहब्बत में महे क़ामिल नहीं होता
ये वो रुतबा है जो हर शख़्स को हासिल नहीं होता,
बहुत गहराई है देखो जुनून-ए-इश्क में जाकर,
समन्दर ही समन्दर है यहाँ साहिल नहीं होता.....
उर्मिला माधव
14.3.2017
बड़ी है
ये जो दरमियाँ हमारे एक खाई सी खड़ी है,
इसके हुए ये मानी,दिल की समझ बड़ी है....
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ye jo darmiyaan hamaare ek khaai sii khadi hai,
iske hue ye maanii..........dil kii samajh badii hai ....
उर्मिला माधव...
14.3.2016
Tuesday, 12 March 2019
दुहाई है
वक़्त ने भी वो अदा दिखलाई है,दुहाई है,
मेरे हिस्से मैं फ़क़त रुसवाई है दुहाई है,
चाँद भी मेरी तरह तनहाई मैं डूबा लगा,
चांदनी चलके यहाँ तक आई है दुहाई है,
उर्मिला माधव...
13.3.2014..
हैरान करदे
ये मर्ग-ए-बशर सा ही ऐहसास क्यूं है,
कभी ज़िंदगी तू भी हैरान कर दे ..
Ye marg-e-bashar sa hii ehsas kyun hai,
Kabhi zindagi tu bhi hairan kar de.
उर्मिला माधव..
13.3.2018
मानूस है
दूर तक पहुंचे तो जाना ये जहां कुछ भी नहीं,
हम समझते थे के दुनिया ....वाक़ई मानूस है,
उर्मिला माधव
मानूस-- मिलनसार, हिलीमिली
Monday, 11 March 2019
धार अब
एक मुक्तक----
तुम हमें अपना बनालो यार अब,
वरना हम हो जायेंगे बीमार अब,
क़त्ल भी कर ही चुके हो बेहिसाब,
अपनी आँखों से हटालो धार अब,
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tum hamen apnaa banaalo.....yaar ab,
warnaa ham ho jaayenge beemaar ab,
qatl bhii kar hii chuke ho......be-hisaab,
apnii aankhon se hataalo......dhaar ab....
उर्मिला माधव...
12.3.2014...
कहते हैं
जहाँ इंसान को मछली,ऑ घर को जाल कहते हैं,
बड़ी हैरत है अपने मुंह से अपना हाल कहते हैं,
उर्मिला माधव
पहाड़ों सी
हमारी ताबानी देखो,कभी तुम रु-ब-रु आकर,
वगरना आँख से ओझल की दूरी है पहाड़ों सी.....
उर्मिला माधव,
12.3.2016
जताते थे
हज़ारों मील की दूरी से जो उल्फ़त जताते थे
ज़रा नज़दीक आते ही वो गाली दे गए मुंह पर ...
उर्मिला माधव
12.3.2017
जुदा होकर
Wo jiski bazm me jaa kar panaah lete the,
Bahut udas hua, us-se dil judaa ho kar,
वो जिसकी बज़्म में जा कर पनाह लेते थे,
बहुत उदास हुआ,उससे दिल जुदा हो कर,
उर्मिला माधव
12.3.2918
क्या करते
न तोड़ लेते अगर दिल तो और क्या करते,
वो जब भी सामने आया तो बस ख़ुदा होकर,
उर्मिला माधव
12.3.2018
Sunday, 10 March 2019
मरते ही बने
ज़ीस्त की बुनियाद ऐसी है कि मरते ही बने,
जितना ही इसको समेटो ये बिखरते ही बने,
अनगिनत रानाइयाँ हैं किसको देखेंगे भला,
सूरत-ए-हालात ये कि ...सिर्फ़ डरते ही बने..
उर्मिला माधव..
11.3.2013
ranaiyan-----khoobsoorati..
सुनाया है अभी
तुमने एक शख्स मुझे याद दिलाया है अभी,
उसकी तर्ज़ों को यहीं गा के सुनाया है अभी,
मुझको दरक़ार है कुछ वक़्त सँभलने के लिए,
उसकी यादों ने बहुत मुझको रुलाया है अभी.....
उर्मिला माधव ...
11.3.2015...
अनादारी
जिनका हर रंग था अनादारी...
वो ही बिछते हैं अब गलीचों से
––––
Jinka har rang tha anaa daari..
Wo hii bichhte hain ab galiichon se..
Urmila Madhav...
11.3.2016
कुछ नहीं जनाब
लो उन्सियत न हमको ज़माने से अब रही,
ग़ैरों की जुस्तजू का सबब कुछ नहीं जनाब...
उर्मिला माधव...
11.3.2017
नहीं किया
जो जिस तरह से आया उसे जज़्ब कर लिया,
मैंने किसी भी ज़ख़्म को...चलता नहीं किया..
उर्मिला माधव
11.3.2018
Saturday, 9 March 2019
अज़ान
मन्दिर में हो अज़ान हों मस्जिद में घन्टियाँ,
सजदे करेगी राह में हर सिम्त कहकशाँ,
नारे हों बोल बम के जो मस्जिद के सहन में,
बस धुन हो या अली की हर इक जिस्मो ज़ेहन में,
बस एक वतन हो दहर में इन्सान का वतन,
मरने के बाद ओढ़ते हैं सब एकसा क़फ़न।। ......... उर्मिला माधव.
10.3.2013
करने चले थे
हम तुम्हारे प्यार में........मरने चले थे,
कैसे अहमक थे कि क्या करने चले थे ...
उर्मिला माधव...
10.3.2014..
बद्दुआ करते हो तुम
अपने लफ़्ज़ों से न जाने क्या कहा करते हो तुम,
तिफ़्ल हो जल्दी बड़ा....ये बद्दुआ करते हो तुम.....
उर्मिला माधव....
10.3.2013...
फ़क़ीरों की शक़्ल में
दरिया में हम खड़े थे,...जज़ीरों की शक्ल में,
और ख़ुद से हम लड़े थे फ़क़ीरों की शक्ल में...
उर्मिला माधव...
10.3.2015
संघर्ष किया
निवृतियों की इच्छा रखकर,...जीवन भर संघर्ष किया,
इसका कुछ अनुमान नहीं है,कितना-कितने वर्ष किया,
उर्मिलामाधव...
10.3.2018...
चल दिया
तूने चाहा छोड़के जाना, तू आख़िर चल दिया,
कम अज़ कम एक राबिता था, वो भी जाने क्या हुआ!
उर्मिला माधव
9.3.2019
रास्ता कोई नहीं
फ़ासले मीलों के हैं और रास्ता कोई नहीं,
तेरी बाबत पूछते रहते हैं कुछ पहले के लोग,
मेरे लब ख़ामोश रहके देखते रहते हैं बस,
वो मुसलसल पूछते हैं,चुप कहाँ रहने के लोग
उर्मिला माधव,
9.3.2019
Friday, 8 March 2019
कमाया करो
यार ये क्या कि यूँ वक़्त ज़ाया करो,
तुम मुहब्बत भी थोड़ी कमाया करो,
पूरी दुनिया में फिरते हो.....मारे हुए,
चलते-फिरते इधर को भी आया करो
आओ बैठो ज़रा दिल की बातें करो,
आधे रस्ते से मत लौट जाया करो,
अपने लफ़्ज़ों में पैदा करो तो असर,
कहते-कहते न तुम भूल जाया करो,
कितनी पहचान रखते हो इंसान की
हर किसी को नहीं गम सुनाया करो
उर्मिला माधव...
9.3.2014..
जा सकती हूँ मैं
एक शेर----
दर्द से भरपूर अपने लफ़्ज़ों की...तासीर से,
हर कलेजे में उतर कर पार जा सकती हूँ मैं....
उर्मिला माधव...
9.3.2014...
मंच है
🙂🙂🙂🙂
आपके हाथों में...ग़र कोई मंच है.
आपकी किस्मत समझ लो टंच है
अच्छे अच्छे ...सामने झुक जायेंगे,
ये क़ता है और..महज़ एक पंच है....
उर्मिला माधव...
9.3.2017
ख़ामोशियां
Usko ye maloom tha, jana nahin hai kis jagah,
Ab dhueN ka zor hai o her taraf khamoshiyaN..
Urmila Madhav,
9.3.2018
Thursday, 7 March 2019
ख़ैर हो गई
तुम जो चले गए तो बहुत.....खैर हो गयी,
कुछ वक़्त मिल गया तो कहीं सैर हो गयी,
अब हाल इस तरह है मेरी जीस्त का सुनो,
अपनी सी लग रही जो कभी....ग़ैर होगयी....
उर्मिला माधव...
8.3.2014....
बिठाया जाएगा
mahila divas ke naam---
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आज "महिलाओं" को माथे पर बिठाया जायेगा,
ख़ास ये है ...एक दिन सब कुछ जताया जाएगा,
सब जमा खर्चे,ज़बानी,.....हर जगह होंगे नमूद,
फिर कहे लफ़्ज़ों को धो-धो कर मिटाया जाएगा,
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aaj mahilaon ko .......maathe par bithaayaa jaayegaa,'
khaas ye hai ..........ek din sab kuchh jataaya jaayegaa,
sab jamaa kharche zabaani,har jagah honge namood,
phir, kahe lafzon ko .dho-dho kar mitaya jaayegaa....
#उर्मिलामाधव ...
8.3.2016...
नारि करी ऊंची
महिला दिवस
इन बातन में कछु नाय धरौ,इक दिन कूँ नारि करी ऊंची,
बाहिर में नारे ख़ूब लगे,पर भीतर लाय धरी,दूंची,
दिन रात तौ घर के काम करै, पर ता की गिनती कौन करै,
हां इतनी किरपा जरूर करी,कुल काम पै, फेर दई कूँची...
उर्मिला माधव..
8.3.2016
कैसे हो
दिल में हुजूमे ग़म है बयाँ हो तो कैसे हो?
कुल ज़िन्दग़ी का दर्द अयाँ हो तो कैसे हो ?
अब ज़िन्दग़ी में ...वैसी हसानत नहीं रही
ख़ाली है जब ज़ेहन ये ग़ुमाँ हो तो कैसे हो?
मुरदार हो चुके हैं ......इबादत के वलवले,
ऐसे में कोई रक्स-ए-समाँ .हो तो कैसे हो?.....
उर्मिला माधव.
8.3/2013
मगर क्या हो
बनाना तो हमें भी था यहां इक घर मगर क्या हो,
ज़मीं के हर मुहाने पर फ़क़त इक लाश रख्खी है
उर्मिला माधव
Wednesday, 6 March 2019
सवाल है
ग़म की सियाह रात है जीना मुहाल है,
क्यूँ मुख़्तलिफ़ है इम्तिहाँ अब ये सवाल है?
तनहाइयों से लड़के ग़ुज़ारी है ज़िन्दगी,
अब तक भी हाथ ख़ाली हैं इसका मलाल है। उर्मिला माधव.
7.3.2o13
लजाई सखी
कैसी झीनी चुनरिया..उढ़ाई सखी,
तैने सबरी नगरिया...हंसाई सखी,
रंग डारौ सबन्ने जो मिलि कें मोहे,
खूब भीतर ही भीतर लजाई सखी....
उर्मिला माधव...
7.3.2014...
भगवान जी
अनवरत कठिनाइयां और मार्ग से अनभिज्ञ हम,
क्यों परीक्षाएं हमारी ली गईं भगवान जी,
उर्मिला माधव,
7.3.2018
जमा भी दूँ
मैं वफ़ा का रंग जमा भी दूँ,
तेरा नाम लब पै सजा भी दूँ,
मुझे क्या मिलेगा नतीजतन,
तू बता तो तुझको,हवा भी दूँ...
उर्मिला माधव..
7.3.2016
मालूम तो हो
मरने को तो मर जाते पर ...बात नहीं जंचती हरगिज़
इसके बाद का जलवा क्या है,ये हमको मालूम तो हो...
#उर्मिलामाधव ...
7.3.2015....
Tuesday, 5 March 2019
कम नहीं होता
हज़ारों चोट लगने पर भी पत्थर नम नहीं होता,
बहुत सी कोशिशों पर भी तेरा ग़म कम नहीं होता....
उर्मिला माधव.
6.3.2013
सब्ज़ होते हैं
बुजुर्गों की मुहब्बत के सहारे सब्ज़ होते हैं,
हमेशा मुश्किलों के वक़्त वो महसूस होते हैं,
ख़ुशी होती है,ग़र शादाब बेलें लहलहाती हैं,
शजर के साये,उनके वास्ते,मह्फूज़ होते हैं...
उर्मिला माधव...
6.3.2014...
सब्ज़---हरे
शादाब---हरा-भरा
शजर---पेड़
मखसूस--- particular ख़ास
यहीं हैं अब
ख़्वाब हम देखते नहीं हैं अब,
जां कहीं और हम कहीं हैं अब,
पहले उड़ते थे आसमानों में,
ख़ास ये है के बस यहीं हैं अब,
उर्मिला माधव ...
6.3.2015....
Monday, 4 March 2019
इशारे होते हैं
इज़हार-ए-मुहब्बत क्या कहिये,
...........आँखों में इशारे होते हैं,
.....उल्फ़त के समंदर के घर में,
............पैदा ये सिपारे होते हैं,
सूली पै चढ़ा मंसूर......तो क्या,
जा देखिये..कूचा-ए-आशिक में,
हर वक़्त........जनाज़े उठने के,
हर सम्त..........नज़ारे होते हैं
मुस्कुराते हैं
दिल के हालात हम छुपाते हैं,
इसलिए.....खूब मुस्कुराते हैं,
दर्द-ए-गम ओढ़नी से ढकते हैं
छुप के....कोने में बैठ जाते हैं,
उर्मिला माधव...
5.3.2014...
होली ख़राब लगती है
मुझको होली ख़राब लगती है,
सच तो ये है,अज़ाब लगती है,
दिल तो मिलते नहीं हैं लोगों के,
झूठ का इक नक़ाब लगती है.....
उर्मिला माधव ...
5.3.2015
क़ीमतें
मेरी सबसे पसंदीदा रचनाओं में से एक
हम चुकाते रह गए ...सच बोलने की कीमतें,
तोड़ कर जाते रहे सब .उम्र भर की निसबतें,
यूँ भी तबियत के हमेशा हम बहुत नादिर रहे,
रास भी आईं तो कुछ तन्हाईयाँ और खिलवतें.
उर्मिला माधव
5.3.2016
Sunday, 3 March 2019
कह दो तो मैं सुनाऊं
छोटी सी दास्ताँ है कहदो तो में सुनाऊं??!
ग़र जो मुलाहिज़ा हो,आगे इसे बढाऊं??...!
छोटी से एक बच्ची पैदा हुई ज़मीं पर,
हर सम्त तीरगी थी,न रौशनी कहीं पर,
बूढ़े पडोसी आये बोले कि क्या हुआ है??
रोते से सब लगें हैं क्या कोई मर गया है ??
घर के बुज़ुर्ग बोले न न ये सच नहीं है,
हंसने की अब हमारी औक़ात बस नहीं है
सब चीज़ ठीक ही है,कुछ भी गमीं नहीं है,
कुछ ख़ास भी नहीं है,न-ख़ास भी नहीं है,
दहलीज़ पर हमारी पैदा हुयी है बच्ची,
इतनी बड़ी मुसीबत किसको लगेगी अच्छी??
सकते में थे पडोसी, बोले कि क्या ग़ज़ब है!!
बच्ची के मामले में ये सोच भी अजब है !!
थोडा सा खांस करके बोले बुज़ुर्ग हंसकर,
हर बात हो रही है इंसानियत से हट कर,
जीने का हक सभीको दुनिया में है बिरादर,
बच्ची हो याकि बच्चा इन्सान सब बराबर
घर के बुज़ुर्ग बोले माथे पे हाथ रख कर,
होता ही क्या है वैसे लफ़्ज़ों से बात ढक कर??
बच्ची की आबरू तक महफूज़ अब नहीं है,
परदे में रहके जीना,जीने का ढब नहीं है...
उर्मिला माधव...
१६.९.२०१३
साथ थे
तुमको देखा तो अचानक ये ख़याल आया हमें,
ज़िन्दगी की रहगुज़र में तुम हमारे साथ ही थे
उर्मिला माधव...
4.3.2016
Saturday, 2 March 2019
पढ़ ली
एक मतला---
तेरी आँखों में लिखी ग़म की इबारत पढ़ ली,
थी तो धुंधली सी मगर हमने इजाज़त पढ़ ली,
#उर्मिलामाधव...
3.3.2015
सीख लो
गर जो हो दिल में .....हुजूम-ए-ख़्वाहिशात,
बंदगी की पहली सफ़ में,बैठना भी सीखलो
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Gar jo ho dil men ...hujoom-e-khwahishat,
Bandagi ki pahli saf men baithna to seekh lo
उर्मिला माधव,
3.3.2017
Friday, 1 March 2019
सो गई
हमको भी मुश्किलों से मुहब्बत सी हो गई,
ये जान के ही बाद-ए-सबा थक के सो गई,
#उर्मिलामाधव ....
2.3.2015...