मुहब्बत का ज़रा सा भी गुमां रहने दिया होता, हमारे दिल में जो भी था हमें कहने दिया होता, सही कहते हैं हम उनसे बहुत उम्मीद रखते थे, कभी तो प्यार को मंझधार में बहने दिया होता.... उर्मिला माधव... 28.7.2016
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