आने लगीं समझ में मुझे ....जब बुराइयां, तब ठीक ही लगी हैं मुझे ...सब जुदाइयाँ घेरे में साज़िशों के .जिया वक़्त को बहुत, पर दी हैं ज़िन्दगी को कहाँ कब सफाइयां उर्मिला माधव.. 1.8.2016
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