मेरा ख़याल-ए-यार से यूँ वास्ता रहे, मैं उनसे मिल सकूँ कि कोई रास्ता रहे वो हमक़दम रहें न रहें कोई ग़म नहीं बस एक मुलाक़ात ही बेसाख्ता रहे.... उर्मिला माधव.. 22.7.2013
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