ये मेरे शेर और क़तआत ---
Thursday, 5 July 2018
धुआं धुंआं
बुझती है अगर आग तो अन्दर धुंआ-धुंआ,
बरहम है ग़र नज़र तो है मंज़र धुंआ-धुंआ,
उर्मिला माधव...
5.7.2014..
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