Tuesday, 10 July 2018

रोते हुए हालों में

अनजान ख़यालों में,गुज़रे हुए सालों में,
सुनसान उजालों मे,हर रात सवालों में,
एक साया उभरता है वो बात भी करता है,
शामिल सा ही लगता है,रोते हुए हालों में..
उर्मिला माधव..
11.7.2013

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