क्यूँ कोई क़िस्सा करे,ग़म के मुतल्लिक जा-ब-जा , ज़ेहन-ओ-दिल इनसान के अब बर्फ़ के घर हो गए, :::::::: Kyun koii qissa kare,gam ke mutallk jaa-b-jaa zehn-o-dil insaan ke aab barf ke ghar ho gaye, उर्मिला माधव... 26.7.2016
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