जिसको है चस्का शराब-ए-वस्ल का, वो मज़ा क्या पाएगा दरअस्ल का ? कितनी शिद्दत है किसीकी चाह में इम्तिहाँ हो आदमी की नस्ल का...... उर्मिला माधव....
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