Thursday, 31 May 2018

पथ्थर सा

ख़ूबसूरत है संग-ए-मरमर सा,
अब बचा दिल तो वो है पथ्थर सा,
उर्मिला माधव...
1.6.2015

ख़तावार हो गईं

Resham ki odhani thi,fisaltii thi baar-baar,
Lohe ki chimtiyaan yun,khatavaar hogaiin

रेशम की ओढ़नी थी,फिसलती थी बार-बार,
लोहे की चिमटियां यूँ ...…...ख़तावार हो गईं..
उर्मिला माधव,
1.6.2017

Wednesday, 30 May 2018

आ गए हम

आपकी दहलीज़ चढ़ कर आगये हम ,
लो जी पूरे घर से लड़कर आ गए हम...
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aapkii dahleez chadhkar aa gaye ham,
lo jii  poore ghar se ladkar aagaye ham ....
उर्मिला माधव...
31.5.2014...

दिले बीमार होता है

कभी ऐसे ग़मों से भी ......जिगर दो चार होता है,
अकेले हम हैं और अपना दिल-ए-बीमार होता है,
अगर हंसने का मौसम हो ज़माना साथ हंस देगा,
नहीं मुश्किल के लम्हों में कोई ग़म ख़्वार होता है...
उर्मिला माधव...
31.5.2015

मुसाहिब हो गया

तेरा दिल रखने की खातिर चार मिसरे कह दिए,
इसके मानी ये नहीं ...के दिल मुसाहिब हो गया....

tujhko bahlaane kii khaatir chaar misre kah diye,
iske maanii ye nahin ke dil musaahib ho gayaa..
#उर्मिलामाधव...
31.5.2015

Tuesday, 29 May 2018

बचा है

Ye to kewal aaj tak kaa waaqayaa hai,
Or kya-kya dekhnaa baaqi bachaa hai..
#UrmilaMadhav..
30.5.2015..

समझाते रहे

वक़्त और हालात  दोनों ....बीच में आते रहे
कौन हूँ  ऑ क्या हूँ मैं,ये मुझको समझाते रहे..
उर्मिला माधव...
30.5.2015.

किनारे कर दिए

राबिते जब इक किनारे कर दिए,
ठोकरों पर सब इशारे कर दिए,

कौन कब आया-गया ये क्या ग़रज़,
सब जुदा ....हमने हमारे कर दिए,
उर्मिला माधव...
30.5.2015

उतर गए होते

इतने ज़्यादः घबराते तो ......डर कर गुज़र गए होते,
ख़ुद अपनी ही पाक़ नज़र से कबके उतर गए होते।।
उर्मिला माधव...
30.5.2016

क्या करूँ

सबकी ग़ैरत सो गई है......क्या करूँ ?
रूह तक जब रो गई है......क्या करूँ?
दिल नहीं गिनता है अब ऐब-ओ-हुनर,
ज़िद सी इसको हो गई है....क्या करूँ?
उर्मिला माधव....
30.5.2016

Saturday, 26 May 2018

निभाने वाले

थक के रो जाते हैं.....किरदार निभाने वाले,
इस क़दर .........दाग़ लगाते हैं,ज़माने वाले,
करना पड़ता है कभी ज़ब्त सरे महफ़िल भी,
सारे अफ़साने...........नहीं होते सुनाने वाले...
उर्मिला माधव..
डायरी से ...

Friday, 25 May 2018

तूफ़ानी

ना क़ायल है सितारों की मेरे चेहरे की ताबानी,
ग़म-ए-दौराँ में भी देखो तबस्सुम मेरा लासानी,
तलातुम चाहे जैसा हो,करेगा क्या उसे फानी..?
कि जिसने डूब कर देखा हो ये दरिया-ए तूफ़ानी
उर्मिला माधव.
26.5.2013

ज़माने की

वाह क्या रस्म है ज़माने की !!
लफ्ज़ बा लफ़्ज़ आज़माने की !!
उर्मिला माधव..
26.5.2013

दाम कितने हैं

वफ़ा लाए हो?लेआओ,बताओ दाम कितने हैं ??
मुहब्बत में तुम्हारी ज़ात को पैगाम कितने हैं ??
गिनाओ तो ज़माने ने तुम्हें क्या-क्या दिया है ??
हमें भी शौक हैं देखें कि इसमें नाम कितने है !!
उर्मिला माधव..
26.5.2013

झिंझोड़ना

पत्थर की चौखटों पै...नहीं सर को फोड़ना,
ख़ामोश ज़लज़लों को कभी मत झिंझोड़ना....
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paththar kii chaukhaton pe nahinn sar ko fodnaa,
khaamosh zalzalon ko......kabhii mat jhinjhodnaa
उर्मिला माधव...
26.5.2014...

हो गया है

अब ह्रदय पाषाण जैसा हो गया है,
हर तरह निष्प्राण जैसा हो गया है,
सब प्रयत्नों से परे है धैर्य भी अब,
जीते जी निर्वाण जैसा हो गया है....
उर्मिला माधव...
26.5.2014...

जीता नहीं

कितनी सारी बाज़ियां हम जीत कर होते हैं ख़ुश,
ज़िन्दगी की आख़री बाज़ी .......कोई जीता नहीं ......
उर्मिला माधव..
26.5.2015

फातिहा हो जाएगा

था हमें मालूम..........कोई हादसा हो जाएगा,
ये नहीं मालूम था.........इतना बुरा हो जायेगा,
दिल के टुकड़े हाथ में लेकर फिरेंगे जा-ब-जा,
जो भी हम लिखेंगे वो सब,फातिहा हो जायेगा....
उर्मिला माधव...
26.5.2015

Thursday, 24 May 2018

आ गया मुझको

सताया इस क़दर तुमने..कि रोना आ गया मुझको,
सिसकते गम में यूँ दामन,भिगोना आ गया मुझको...
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sataaya is qadar tumne...............ki rona aagaya mujhko.
sisakte gam main yun daaman bhigona aagaya mujhko,
उर्मिला माधव...
25.5.2014...

याद क्या आता हमें

रास्ता मुड़ता गया,...बस हम क़दम रखते गए,
इस मशक्क़त में कोई भी,याद क्या आता हमें ?
उर्मिला माधव,
25.6.2016

समझे नहीं

बात जो हमने कही वो ख़ास कुछ समझे नहीं,
ज़िंदगी ले इक ख़सारा ..और हमने कर लिया..
उर्मिला माधव..
25.5.2017

Wednesday, 23 May 2018

सौगात मिली

इक ख़ुशी इक दर्द की सौगात मिली,
हाए दो रंग में डूबी हुई हर बात मिली,

ek khushi ek dard ki saugat mili,haye do rang main doobi huyi her baat milee.........by urmila madhav....

मज़ा लेते हैं

अपनी साँसों से हवाओं को परखने वाले,
दूर से देख के जलवों का मज़ा लेते हैं

apni saanson se hawaaon ko parakhne waale,
door se dekh ke jalwon ka maza lete hain,..
उर्मिला माधव
24.5.2013

चराग़ हैं

तुम किसके रु-ब-रु हो तुम्हें होश ही नहीं,
हम अपनी ख़ासियत के अकेले चराग़ है...
उर्मिला माधव...
24.5.2017

Tuesday, 22 May 2018

आसान हो गए हैं

अब रास्ते हमारे आसान हो गए है,
हर बात हर बला से अंजान हो गए,
रोया किये शबो-ओ-शब जिन हसरतों की ख़ातिर,
कुछ यक़-ब-यक़ लगा हम नादान हो गए हैं,
ता ज़िंदग़ी सम्हाला,जिन चाहतों को हमने,
सब सिलसिले वहाँ के वीरान हो गए हैं,
पर ये ज़माने वाले जाने क्यूँ हँस रहे हैं,
मेरी नज़र में ये सब बे-ईमान होगए हैं।। उर्मिला माधव.
9.3.2013

किससे रखना राब्ता

खिज्र-ए-मंजिल कौन किसका,किससे रखना राब्ता
ग़ैर वाज़िब सा लगे है ............जा-ब-जा यूँ तज़्किरा,
ज़िन्दगी ऐसा सफ़र है.........सब मुसलसल चल रहे,
अपने अपने पाँव सबके..........अपना-अपना रास्ता.....
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khizr-e-manzil kaun kiska,kis'se rakhnaa raabtaa,
gair vaazib sa lage hai,jaa-b-jaa yun tazkiraa,
zindagi aisaa safar hai,sab musalsal,chal rahe,
apne-apne paanv sabke,apnaa-apnaa raastaa..
उर्मिला माधव...
23.5.2014...

रोज़ बदली जाएंगी

सुर्खियाँ अख़बार की....हर रोज़ बदली जायेंगी,
सोचते हैं प्रैस वाले.........कि ये पढ़ ली जायेंगी,
ये समझना चाहिए......कुछ लोग ला-परवाह हैं,
आएँगी ख़बरें मगर...आँखें ही ढक ली जायेंगी,
उर्मिला माधव...
23.5.2014...

वक़्त लग गया

इक ज़लज़ले की झोंक में कुछ दूर जा गिरे
हाथों के बल उठे तो ज़रा वक़्त लग गया...
उर्मिला माधव...
23.5.2015

नज़र भी आएगा

वक़्त है दरअस्ल क्या ये वक़्त ही बतलायेगा,
ख़ास है मंज़र पसे मंज़र,...नज़र भी आएगा,

waqt hai darasl kya ...........ye waqt hi batlayega,
khas hai manzar,pase manzar,nazar bhi aayega....
Urmila Madhav
23.5.2016

मिर्ज़ा नौशा

लोग मिर्ज़ा नौशा को भी ताक़ पर रखते रहे,
किस कदर दुनियां हसद के रंग में डूबी रही...
उर्मिला माधव....
23.5.2017

Sunday, 20 May 2018

क्या मिला

Is qadar ilzaam dekar kyaa milaa?
Kyaa yahii hotaa hai ulfat ka silaa?
Dil dukhaa kar kya tumhen miltaa hai jii,
Musataqil hai kyon abhii tak silsilaa....
Urmila Madhav...
21.5.2015

मग़रूर होगए

बस आईने में उसके,उतरने की फ़िक्र में,
दुनियाँ की हर खुशी से बहुत दूर हो गए,
तन्हाइयां मिलीं सो मिलीं,अश्क़ भी मिले,
नज़रों में सबकी बे-सबब मगरूर हो गए,
उर्मिला माधव....
21.5.2014...

क्या बात थी

है कोई पत्थर किसी भी राह का तो क्या सबब,
मील का पत्थर कोई होता तो फिर क्या बात थी...
#उर्मिलामाधव...
२१.5.2015

ख़ूबियाँ कोई नहीं

राह जो चलनी है इसमें खूबियाँ कोई नहीं,
रूह-ए-खुद को छोड़ के वक़्त-ए-गिरां कोई नहीं,

पथ्थरों के आदमी हैं और दहर जलता हुआ,
चिलचिलाती धूप है ऑ आशियाँ कोई नहीं,

और कितना आज़माना,जो हुआ वो खूब है,
तुम वही हो,हम वही राज़-ए-निहां कोई नहीं,

है नया कुछ भी नहीं क्यूं इस क़दर हैरां हुए,
साथ चलने को हमारे ,अय मियाँ कोई नहीं,

सामने मक़्तल हुआ लो फ़िक़्र से खारिज़ हुए
बस यही रस्ता है...जिसके दरमियाँ कोई नहीं.....
उर्मिला माधव....

घर बहा कर ले गया

हमको अपनी अक़्ल पे हैरानगी होती रही,
हम वहीँ बैठे थे,दरिया घर बहा कर ले गया!!!!🙄
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Hamko apni aql pe .....hairangi hoti rahi,
Ham wahin baithe the,dariya ghar baha kar le gaya !!
Urmila Madhavv
21.5.2916

रहगुज़र

ये जो सब मायूसियां हैं, ये तो इनकी रह गुज़र है,
मुझको इनकी फ़िक़्र है ना इनको मेरी फ़िक़्र है...
उर्मिला माधव
21.5.2016

Saturday, 19 May 2018

बुनता है

आदमी अपने लिए खुद ही कफ़न बुनता है,
और मज़ा ये है .....कोई बात नहीं सुनता है.....
उर्मिला माधव...
20.5.2015

लहू लिखती रहीं

क्यूँ दिल-ए-बिस्मिल का किस्सा हम कभी कहते कहीं,
बस हमारी उँगलियाँ .........कसदन लहू लिखती रहीं ...
उर्मिला माधव...
20.5.2015..

Friday, 18 May 2018

रिणीं हैं प्यार के

क्यों जतन कोई करें मनुहार के?
जो दिया सबने,ऋणी हैं प्यार के,
अपना ये जीवन यूँ ही कट जाएगा,
व्यर्थ ही झगडे हैं सब संसार के ...
#उर्मिलामाधव...

लहू रिसने तक

ज़ब्त करते हैं ........लहू रिसने तक,
और झुकते हैं ......जबीं घिसने तक,
हमने जब दैर-ओ-हरम समझी ज़मीं,
आह भरते हैं ......बहुत पिसने तक ....
#उर्मिलामाधव...
19.5.2015

Thursday, 17 May 2018

भान है

भूमिका मित्रों की मित्रों में बहुत आसान  है,
मित्रता के साथ जब दायित्व का भी भान है....
उर्मिला माधव...
13.5.2014...

तन्हाई

राहें बहुत हैं लंबी....,तन्हाई है,सफ़र है,.
गाड़ी है और मैं हूँ,इक राह पुर शजर है....
#उर्मिलामाधव...
18.5.2015!

ज़हन के लिए

पहले भी कह रहे थे .......फ़क़त ज़ेह्न के लिए,
हम आज भी उसी से मुतास्सिर हैं जान-ए-मन..
18.5.2017

कोह-ए-नूर पा लोगे---

nishaane hamne saadhe hain,kamaanen tum sanbhaaloge ?
bahut gahraaii hai dil men............kahan tak tum khngaloge ?
sadaf hamko samajh kar tumne.......kitnii baar phenkaa hai,
dikhaanaa, ham bhi dekhenge jo koh-e-noor kohinoor paa loge.....

निशाने हमने साधे हैं...........कमानें तुम संभालोगे ?
बहुत गहराई है दिल में .....कहाँ तक तुम खंगालोगे ?
सदफ़ हमको समझ कर तुमने कितनी बार फेंका है,
दिखाना, हम भी देखेंगे, जो कोह-ए-नूर पा लोगे
Urmila Madhav...
18.5.2016

Wednesday, 16 May 2018

महबूब हो गए

दिल के इरादे चाँद से .…...मन्सूब होगए,
फिर क्या कहें के बज़्म में हम ख़ूब होगए,
लोगों ने हमको प्यार से दिल में पनाह दी,
हम भी बरा ए नाम फिर.....महबूब होगए..
उर्मिला माधव..
17.5.2013

कई बार मर गए

जो भी किसीसे प्यार का इज़हार कर गए,
मजबूर ऐसे होगए बिलकुल बिखर गए,
जो ज़िन्दगी के नाम की ज़िन्दा मिसाल थे,
वो अपनी ज़िन्दगी में कई बार मर गए।।....
उर्मिला माधव.
13.3.2013

भूल कुछ होगी ज़रूर

अपनी हस्ती पर बुलन्दी का ग़ुमाँ रखते हैं जो,
उनके दिल के आईने पर धूल कुछ होगी ज़रूर,
अपने घर में नाक़ाबन्दी का समाँ रखते हैं जो,
इसके मानी ये हुए के भूल कुछ होगी ज़रूर।।
उर्मिला माधव..
17.5.2014

छल्ला दिखाइए

कुछ आईनों को तोड़ के हल्ला मचाइए,
आवाज़ देके सर पै......मुहल्ला उठाईए,
अपनी गली में झाँक के.नीचे को देखिए,
उंगली का सारी भीड़ को छल्ला दिखाईए....
उर्मिला माधव...
17.5.2014...

ग़म खा गई

दिन  उजालों तक ठहर पाया नहीं,
रात तो फिर रात थी ...गहरा गई,

माज़रा तो सब समझ आता रहा,
आदतन ही ज़िन्दगी ग़म खा गई,
उर्मिला माधव
17.5.2017

गढ्ढे खोद कर

हम वो गढ्ढे खोद कर ...खुश हो गये,
जिनमें ख़ुद ही हमको गिरना था कभी..
उर्मिला माधव....
17.5.2017

Monday, 14 May 2018

रीत कहां से जानोगे

जब प्रीत नहीं पहचानोगे तो रीत कहाँ से जानोगे?
जब ह्रदय में झन्कार नहीं,संगीत कहाँ पहचानोगे?
जब भावों का संसार नहीं तुम गीत कहाँ पहचानोगे?
जब अंतर्मन में पीर नहीं,मन मीत कहाँ पहचानोगे?
उर्मिला माधव.....

कुछ नहीं होगा

आने जाने से कुछ नहीं होगा,
तुमको पाने से कुछ नहीं होगा,
हुईं वीरान दिल की गलियाँ ही,
घर सजाने से कुछ नहीं होगा..
उर्मिला माधव..
15.5.2013

रिश्ते तमाम होते हैं

हादसे सुब्ह-ओ-शाम होते हैं,
रोज़.....रिश्ते तमाम होते हैं,

अपने अखलाक़ पे,नज़र ही नहीं,
दाग़........लोगों के नाम होते हैं,

जो भी चाहा जुबां से कह डाला,
और तब क़त्ल-ए-आम होते हैं,

जो ये मजमा लगाया करते हैं,
इनके...लफ़्ज़ों के दाम होते हैं,

जो हैं दिल से दिमाग़ से शातिर,
उनको....झुकके सलाम होते हैं,
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haadse subh-0-shaam hote hain,
roz......rishte tamaam hote hain,

apne akhlaaq pe nazar hi nahin,
daagh logon ke naam hote hain,

jo bhi aaya zubaan se kah daalaa,
or tab........qatl-e-aam hote hain,

jo ye majmaa lagaaya karte hain,
inke.....lafzon ke daam hote hain,

jo hain dil se dimaagh se shaatir,
unko...jhuk ke salaam hote hain....
Urmila Madhav..
उर्मिला माधव...
15.5.2014...

दम नहीं है

ग़म बहुत है आँख लेकिन नम नहीं है,
बा-ख़ुदा तुझसे ये दिल बरहम नहीं है,
ये समझ मुश्किल है ग़म से चूर रहना,
पाँव चलते हैं ...मगर कुछ दम नहीं है....
#उर्मिलामाधव्....
15.5.2015

इतराएगा ही

:)
क्या मज़ाक ए हुस्न है इनसान का अब,
साँस है जब तक, अबस इतरायेगा ही,....
urmilamadhav....
15.5.2015

सीख लो आ कर

दिल जलाना क्या है हमसे सीख लो आकर,
तुम्हें आता कहाँ है आज तक भी दिल जलाना...
उर्मिला माधव....
15.5.2015

Sunday, 13 May 2018

पाँव बढ़ाने नहीं दिया

नक्शा तेरी जमात का कुछ और ही रहा,
एक पाँव भी किसीने....बढ़ाने नहीं दिया...
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nakshaa terii jamaat kaa kuchh or hii rahaa,
ek paanv bhi kisiine badhaane nahin diyaa...
Urmila Madhav
14.5.2014...

Friday, 11 May 2018

हिफाज़त हो

बहुत ख़ामोश है ये दिल मगर कब तक हिफ़ाज़त हो
कोई ख़ामोश हस्ती भी कभी कुछ बोल जाती है,

बहुत ख़ुद्दार है ये दिल,मगर कब तक रक़ाबत हो,
कोई ख़ुद्दार हस्ती भी,कभी कुछ डोल जाती है।।उर्मिला माधव...

बे-ख़बर

के तू खुशनसीब था बे-ख़बर,
मेरे दिल पै तेरा हुआ असर,
ले ये बात बनके बिख़र गई,
तेरे बिन है दिल की गुज़र बसर,
उर्मिला माधव...
12.5.2015

वेदना के स्वर

वेदना के स्वर मुखर होने लगे सब,
शून्य से थे क्यूँ प्रखर होने लगे अब ??
हम ह्रदय पाषाण वत...रखते रहे हैं,
टूट कर गिरते शिख्रर होने लगे कब ??
उर्मिला माधव ...
12.5.2015...

Thursday, 10 May 2018

दूर कहते हो

वफादारी,हयादारी,के फन से.....दूर कहते हो,
न जाने क्या समझते हो मुझे,मगरूर कहते हो,
मगर हूँ मुत्मईन मेरी हकीक़त को समझते हो,
ये अच्छा है मुहब्बत में मुझे...माजूर कहते हो...
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wafaadari,hayaadaarii,ke fan se door kahte ho,
n jaane kyaa samajhte ho mujhe,magroor kahte ho
magar hun mutmaiin merii haqiiqat ko samajhte ho
ye achcha hai muhabbat main mujhe maajoor kahte ho
उर्मिला माधव...
11.5.2014..

मुत्मईन-----निश्चिन्त,
मगरूर------घमंडी ,
माजूर----- लाचार

Wednesday, 9 May 2018

क़ता

लौट जाने को जी चाहता है,
फिर न आने को जी चाहता है,
बन्द पलकों में आँसू बहुत हैं,
डूब जाने को जी चाहता है....
उर्मिला माधव
10.5.2013

दस्तार में

ग़र ज़ियादह पेच रख्खोगे मियाँ दस्तार में,
और ज़ियादह ख़ुश्क लहज़ा आएगा गुफ्तार में...
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jitne zydaa pench rakhkhoge miyaan dastaar main,
utnaa zyda khushq lahzaa aayegaa....guftaar main...
उर्मिला माधव...
10.5.2014..
दस्तार--- पगड़ी
गुफ्तार---बातचीत

Tuesday, 8 May 2018

चीमा गोइयाँ

जब मुक़द्दर ख़ुद बनाता और मिटाता है बशर,
किसलिये करता है चीमा गोईयां फिर ग़ैर पर..
उर्मिला माधव..
9.5.2016

फ़िज़ूल

दुनियां के लोग कितने ...ख़ुशामद पसंद हैं,
दानिशवरों की सफ़ में खड़े हो गए फ़िज़ूल....
उर्मिला माधव,
9.5.2017
दानिश्वर --- अक़्लमंद

आदत बनी रही

बेहतर रहा ...के साथ हर इक छूटता रहा,
मुझको अकेले चलने की आदत बनी रही...👍😊
9.5.2017

दूर कर दिया

बोले के साथ मैं भी नहीं दूंगा उम्र भर,
मैंने अकेले चल के उन्हें दूर कर दिया...
उर्मिला माधव..
9.5.2017

Monday, 7 May 2018

दुआ करो

जो सुकून-ओ-चैन अता करे मेरे हक़ में ऐसी दुआ करो,
जो तुम ही ने मुझको दिए हैं सब वही ज़ख़्म तुम न छुआ करो,
जिसे इल्म ही न हुआ कभी किसी बन्दगी का चलन है क्या ?
तुम्हें ख़ुद पै कितना ग़रूर है जो भी होगे तुम वो हुआ करो।।..
उर्मिला माधव
6.4.2013

किधर देखूं

इधर देखूँ,उधर देखूँ,बताओ,मैं किधर देखूँ ??
दिखाई तुम ही जब दोगे,तो फिर चाहे जिधर देखूँ ??
सहर देखूँ,महर देखूँ,या दुनियाँ का क़हर देखूँ ??
मुसलसल दर्द है तो फिर,न क्यूँ दर्दे जिगर देखूँ...?? Urmila Madhav.
8.5.2013..

ज़रूरी है

मुहब्बत हो गई है ग़र........तो होने दो ज़रूरी है,
मगर इतना समझ लेना मशक्कत इसमें पूरी है.
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muhabbat ho gayi hai gar ye hone do......zaroori hai,
magar itna samajh lena mashaqqat ismain poorii hai...
उर्मिला माधव...
8.5.2014...

निबाह है

मैं खुशामद पसंद हूँ ही नहीं,
न कभी की है और न चाही है,
दिल ये शैदाई है अना का बस
जिससे हर हाल में निबाही है
उर्मिला माधव...
८.5.2015

आब-ए-हयात रख लूँ

इंसाँ की ज़िन्दगी भी.....हर ग़ाम इम्तिहाँ है,
तौफ़ीक़ मुझको देदे......आब-ए-हयात रखलूँ,
कैसी भी रहगुज़र हो....रफ्तार हो मुक़म्मल,
महफ़िल में आलिमों की अपनी बिसात रखलूँ
उर्मिला माधव...
8.5.2014..
insaan ki zindagi bhi hae ghaam imtihaan hai,
taufiiq mujhko dede,aab-e-hayaat rakh loon,
kaisii bhi rahghuzar ho raftaar ho muqammal,
mahfil main aalimon kii apni bisaat rakh loon ....
उर्मिला माधव
8.5.2014..

ख़ुशामद

मैं खुशामद पसंद हूँ ही नहीं,
न कभी की है और न चाही है,
दिल ये शैदाई है अना का बस
जिससे हर हाल में निबाही है
उर्मिला माधव...
8.5.2015

मातृ दिवस

आज माता दिवस है.......क्या बात है..!!
ये एक दिन ही बस है.....क्या बात है..!!
आपने जो कहा.उसमें कुछ दम नहीं...!!
यूँ ही झूठी बहस है........क्या बात है..!!
Urmila Madhav.....
8.5.2016

ख़ून शम्मा ऒर परवाने का

Khoon shamma or parwane ka sang-sang ho gaya
Log apni ungliyon par,jaane kya ginte rahe...
::::
ख़ून शम्मा और परवाने का संग-संग हो गया,
लोग अपनी उंगलियों पर जाने क्या गिनते रहे ,
उर्मिला माधव

Saturday, 5 May 2018

दरअस्ल का

जिसको चस्का हो शराब-ए-वस्ल का,
वो मज़ा क्या पाएगा दरअस्ल का
कितनी शिद्दत है किसीकी चाह में
इम्तिहाँ है आदमी की नस्ल का।..
उर्मिला माधव
6.5.2013..

Wednesday, 2 May 2018

अधूरी सी लगे

उनसे गुफ्तार मुसलसल है मेरी सदियों से,
पर कोई बात है कहके भी अधूरी सी लगे....
#उर्मिलामाधव ...
2.5.2015