Thursday, 5 March 2026

एक हुजरे में सजी

एक मतला दो शेर...
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एक हुजरे में सजी महफ़िल ग़मों की आइये,
है मयस्सर भी जगह आ जाइए जम जाइए,

लोग कहते हैं कि ये हुजरा मिरे ही नाम है,
क्या हकीक़त है इसे हज़रात सब बतलाइए,

बे-दर-ओ-दीवार का सा है तो इक हुज रा यहाँ,
इसलिए दर है खुला जब दिल करे आ जाइए,
उर्मिला माधव...
6.3.2014...

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