ये मेरे शेर और क़तआत ---
Monday, 9 March 2026
आ भी जाओ कि अब
आ भी जाओ कि अब क़रार नहीं,
ज़िन्दगी है तो पर ख़ुमार नहीं,
कैसी बेजान फ़िजाँ लगती है,
मेरी बगिया में अब बहार नहीं,
रात दिन इतना याद करते हैं,
मेरी आहों का कुछ शुमार नहीं...
Urmila Madhav
10.3.2013
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