Monday, 9 March 2026

बाम तक पहुंचते

"दिलदार कोई मिलता तो बाम तक पहुँचते,
आग़ाज़ ही नहीं क्या अन्जाम तक पहुंचते,
मौसम तो बहुत देखे ना आज सा था कोई,
थी सुबहा बहुत काली क्या शाम तक पहुँचते ?....उर्मिला माधव... ♥""
31.1.2012

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