Friday, 27 March 2026

ज़ुल्म ए उल्फ़त

ज़ुल्म-ए-उल्फ़त को ज़रा एक सदा देदी है,
कितने नादान हैं रँजिश को हवा देदी है।।..
उर्मिला माधव..
28.3.2013

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