ये मेरे शेर और क़तआत ---
Monday, 9 March 2026
मंदिर में हो अज़ान
मन्दिर में हो अज़ान हों मस्जिद में घन्टियाँ,
सजदे करेगी राह में हर सम्त कहकशाँ,
नारे हों बोल बम के हर मस्जिद के सहन में,
बस धुन हो या अली की हर इक जिस्मो ज़हन में,
बस एक वतन हो दह्र में इन्सान का वतन,
मरने के बाद ओढ़ते हैं सब एकसा क़फ़न।। ......... उर्मिला माधव.
10.3.2013
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