ये मेरे शेर और क़तआत ---
Saturday, 21 March 2026
सामना करते रहो
तुम मुसलसल ज़िंदगी का सामना करते रहो,
बिल वजह ही ख़ुद को ग़म का जाम ना करते रहो
दिल ही दिल में ख्वाहिशों की कामना करते रहो
दिल को अपनी जिंदगी से आशना करते रहो,
जो मुक़द्दर में लिखा है ख़ुद ब ख़ुद मिल जाएगा,
अपनी जाती उलझनों को आम ना करते रहो
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