ये मेरे शेर और क़तआत ---
Tuesday, 17 March 2026
चली आई
मैं उन्हें छोड़ कर चली आई
राबिता तोड़ कर चली आई
रु ब रू थे तो ज़ब्त मुश्किल था,
पीठ बस मोड़ कर चली आई...
उर्मिला माधव
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