ये मेरे शेर और क़तआत ---
Friday, 27 March 2026
रोज़ लिखते हैं और मिटाते हैं
रोज़ लिखते हैं और मिटाते हैं,
क्यूँ....कलम लेके बैठ जाते हैं??
पूरी शिद्दत से....यूँ निभाते हैं,
रोटियाँ जैसे....इसकी खाते हैं....
उर्मिला माधव...
28.3.2014...
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