हर कोई ख़्वाबों से ऊपर झांकता है, उसपे हैरत ये ..........के शैदाई नहीं, ज़ुल्मतों के दम पे ..दुनियां नापता है, उसपे हैरत ये ..........के बीनाई नहीं, उर्मिला माधव 14.4.2018 ज़ुल्मत--अंधकार
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