Saturday, 13 April 2019

शैदाई नहीं

हर कोई ख़्वाबों से ऊपर झांकता है,
उसपे हैरत ये ..........के शैदाई नहीं,
ज़ुल्मतों के दम पे ..दुनियां नापता है,
उसपे हैरत ये ..........के बीनाई नहीं,
उर्मिला माधव
14.4.2018
ज़ुल्मत--अंधकार

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