Tuesday, 16 April 2019

आज़्मतर

आदत रही है ...ज़ब्त से जीने की उम्र भर,
अपना ख़याल कर लिया है हमने मुख़्तसर,
वैसे भी हमको आपने अब तक दिया है क्या,
हैरत है.....बस अना ही रही सिर्फ़ आज़्मतर ....
उर्मिला माधव...
17.4.2015...

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