ताने-बाने ज़िन्दग़ी के .........राह क़ब्रिस्तान की, जी में जो आया किया कब फ़िक्र की ईमान की, क्यूँ कलेजा मुँह को है ले क़त्ल का दिन आ गया देख ले ये ही हक़ीक़त है .........यहाँ इन्सान की ।.. Urmila Madhav 8.4.2016
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