पेचो ख़म गिनवा रहा है ज़ुल्फ़ के, वो हवा से काम लेना जानता है... उसकी महफ़िल में वफ़ा कुछ भी नहीं, जो वफ़ा का नाम लेना जानता है उर्मिला माधव
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