Friday, 19 April 2019

दिखाई दे

सहर और शाम आपस में,मिली जैसी दिखाई दे,
कि जैसी देखना चाहें........नहीं वैसी दिखाई दे,
समझना ही पड़ेगा ये...भरम है आँख का शायद,
कभी कैसी दिखाई दे........कभी कैसी दिखाई दे...
उर्मिला माधव...
20.4.2014...

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