अपनी आदत से बाज़ आ जाओ, होश में अहल-ए-राज़ आ जाओ, पहले जो महव-ए- ख़्वाब होते थे, बंद कर दो बयाज़ ......आ जाओ.. उर्मिला माधव, 25.4.2017
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