जो दर्द मिल गया है,परदे में रहने दीजे, ख़ामोशियां हैं वाजिब ज़ाहिर कहीं न कीजे.. ख़ामोश होठ सीं ले ज़ाहिर कहीं न कीजे.... उर्मिला माधव... 12.4.2014...
No comments:
Post a Comment