है रजामंदी....कि एक महबूब होना चाहिए, और उसको अक्ल से भी खूब होना चाहिए, आशिकी हर वक़्त की,अच्छी नहीं होती हुज़ूर, मंज़र-ए- दुनिया से भी...मंसूब होना चाहिए. उर्मिला माधव... 7.4.2014...
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