पानी के एक गिलास का जो कर्ज़ हो गया, हम उम्र भर उसी की सतह पर खड़े रहे, ग़म में शुमार होने लगा बार-ए-ज़िन्दगी, ज़ख्मों के नक्श थे के,ज़िबह पर अड़े रहे... उर्मिला माधव, 28.4.2017
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