मौत की तारीकियों से..हौसला क्यूँ पस्त है?? ज़िन्दगी के साथ ही..इसका भी बंदोबस्त है, एक हलके ज़िक्र से कहते हैं सब कि शुभ कहो", वाह उसको आफरीं जो बिन डरे अलमस्त है... उर्मिला माधव... 25.4.2014...
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