हादसे ज़िन्दगी के कहाँ ले गए ? मुद्दतों हमसे ग़म ना संभाले गए, अपने घर के अँधेरों को दी रोशनी, लोग मेरे ही घर की शमाँ लेगए।।. Urmila Madhav 27.4.2013
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