Friday, 26 April 2019

संभाले गए

हादसे ज़िन्दगी के कहाँ ले गए ?
मुद्दतों हमसे ग़म ना संभाले गए,
अपने घर के अँधेरों को दी रोशनी,
लोग मेरे ही घर की शमाँ लेगए।।.
Urmila Madhav
27.4.2013

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