Thursday, 28 February 2019

सो गए हैं

सियासत के नाम...
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सब के सब बहरूपिये से हो गए हैं,
चंद सिक्कों की ख़नक में,खो गए हैं,
दर्द की आवाज़ ये सब क्या सुनेंगे,
कान में उँगली घुसा कर सो गए हैं....
उर्मिला माधव...
१.3.२०१४ ...

कमाल करे

ज़िन्दगी कमाल करे.....कैसे-कैसे हाल करे,
कोई जब सवाल करे..कहो क्या बताएँ हम??
हर घड़ी मलाल करे,ऐसी कुछ मिसाल करे,
रंज-ओ-गम बहाल करे,पार कैसे पायें हम ??
उर्मिला माधव..
1.3.2016

आकिल है

हर एक शख़्स यहाँ ख़ुद-ब-ख़ुद में आकिल है,
तो फिर वो कौन हुए,...जिनको बेवकूफ़ कहा ?
🤔🤔🤔🤔🤔
Har ek shakhs  yahan,khud-b-khud men aaqil hai,
To Phir wo kaun hue, jinko bewakuf kahaa?
उर्मिला माधव,
1.3.2017

Wednesday, 27 February 2019

मीत कहें हम

तुमको कैसे मीत कहेँ हम,
हार को कैसे जीत कहेँ हम,
जो अब तक ना देखी हमने,
उसको कैसे प्रीत कहेँ हम।।         
              उर्मिला माधव.....

दिलकशी करलो

एक मतला----

पैदा,जज़्बों में दिलकशी करलो,
या करो यूँ के ख़ुदकशी कर लो,...
#उर्मिलामाधव....
28.2.2015...

जीने नहीं देती

ख़ामाख़यालियों  में सुलगते हैं जिनके ग़म,
उनको दिलों की आग ही...जीने नहीं देती.....
उर्मिला माधव...
28.2.2017

तोड़ दी हमने

Ik khalish leke tod dii hamne,
Jisko hum dosti samajhte the,
Un ko apna banaake dekh liya,
Jo faqat ajnabi samajhte the,

इक ख़लिश लेके तोड़ दी हमने,
जिस को हम दोस्ती समझते थे,
उनको अपना बनाके देख लिया,
जो फ़क़त अजनबी समझते थे
उर्मिला माधव
28.2.2018

Tuesday, 26 February 2019

हर्फ़ है

ज़िन्दगी,ज़िन्दादिली बस नेमतों का हर्फ़ है,
है बुलन्दी एक जैसी, नाम भर का फ़र्क़ है,
भूल जाए ज़िन्दगी को जो इसे रुसवा करे,
ऐसी रुसवाई के मानी तो ज़रेब-ए-ज़र्फ़है  ....
उर्मिला माधव..
27.2.2013

तीर और तलवार

😊😊😊
एक ज़रा सी बात से वो इस क़दर घबरा गए,
एक पल में तीर और तलवार लेकर आ गए,
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उर्मिला माधव
27.2.2016

अकेले राह में

ज़िन्दगी भर हम अकेले ही चले हैं राह में,
इसलिए तनहाई से अब दोस्ती सी हो गई.
उर्मिला माधव
27.2.2016

परवर दिगार तुम

मुझको ये लग रहा है,कहीं आस-पास हो,
कैसे करिश्मा साज़ हो,.परवर दिगार तुम?
उर्मिला माधव,
27.2.2017

Monday, 25 February 2019

अच्छा है रंग

माँग में सिन्दूर भर के बोले क्या अच्छा है रंग,
अब किसी भी ग़ैर को दुल्हन बनाना है मना....          उर्मिला माधव.

हो गई है अब

उन्हें हमसे मुहब्बत में शिकायत होगई है अब,
कि पैग़ाम-ए-मसर्रत में किफ़ायत होगई है अब,
ज़रूरी तो नहीं अब तक वो हमको याद ही रक्खें
निगह-ए- ग़ैर की उन पर इनायत होगई है अब..
उर्मिला माधव.
26.2.2013

शेर हिंदी

मिली दृष्टि तब मित्र हमारे,आशा से अतिरिक्त मिले,
दृष्टि घुमाई ज्यों ही हमने,...ह्रदय प्रेम से रिक्त मिले,
उर्मिला माधव...
26.2.2015...

देख लेते हैं

उफ़ ये पुरज़ोर, हवाएं,ये आंधियां, ये चराग़,
ज़िंदगी किसकी मुक़म्मल है,....देख लेते हैं,
उर्मिला माधव,
26.2.2017

Sunday, 24 February 2019

उदास क्यूँ है

बारिश तो हो रही है सावन उदास क्यूँ है?
तनहाइयों का आलम ही आसपास क्यूँ है?
काली घटा के साये घिर-घिर के आ रुहे हैं,
अब तेरी मुहब्बत का ऐसा लिबास क्यूं है?.....
उर्मिला माधव
25.2.2013

देदो मुझे

गुल नहीं बुलबुल नहीं तुम गुलबदन कहदो मुझे,
अपने गुलशन की फ़िज़ाँ का रंग-ए-गुल देदो मुझे,
अपने शाने पर मेरा सर देखना तुम दम ब दम,
अपनी साँसों की तपिश का ज़लज़ला देदो मुझे,
और उसी अन्दाज़ में मर जाऊँ है ख़्वाहिश मेरी,
तुम ज़ुबाँ से हाँ कहो एक सिलसिला देदो मुझे ।।....
उर्मिला माधव
25.2.2013

आब-ए-हयात रख लूं

इंसाँ की ज़िन्दगी भी हर ग़ाम इम्तिहाँ है,
तौफ़ीक़ मुझको देदे आब-ए-हयात रखलूँ,
कैसी भी रहगुज़र हो,रफ्तार हो मुक़म्मल,
महफ़िल में आलिमों की अपनी बिसात रखलूँ

insaan ki zindagi bhi hae ghaam imtihaan hai,
taufiiq mujhko dede,aab-e-hayaat rakh loon,
kaisii bhi rahghuzar ho raftaar ho muqammal,
mahfil main aalimon kii apni bisaat rakh loon ....
उर्मिला माधव
3.7.2013

ग़मगुसारी

ज़िंदगी करती न हरगिज़ ...ग़म गुसारी,
एक दिन हलका तो इक दिन ख़ूब भारी..
उर्मिला माधव,
24.2.2017

आ गए हैं हम

मुश्किल ऑ हादिसात से घबरा गए हैं हम,
ये कौनसा जहाँ है,....कहाँ आ गए हैं हम?
उर्मिला माधव,
24.2.2017

Saturday, 23 February 2019

शत-शत प्रणाम

आप हैं शीर्षस्थ प्रभुवर,आपको शत-शत प्रणाम,
आप संचालक जगत के आपको शत-शत प्रणाम,
आपकी महती कृपा की ....विश्व में महिमा अपार,
हो नमन स्वीकार मेरा ...आपको शत-शत प्रणाम..
उर्मिला माधव,
24.2.2017

फ़ितूर है

ये ऐसी जुस्तजू है कभी रुक नहीं सकी,
लेकिन किसीके रू-ब-रू ये झुक नहीं सकी,
कहते हैं जिसको इश्क़ दिमाग़ी फ़ितूर है,
फ़िर भी ये दिल की राह में आता ज़रूर है ।....
उर्मिला माधव..
23.2.2013

जंग ए अदावत

मैदान-ए-जंग है ये मेरी ज़िंदगी हुज़ूर,
बेबाक़ होके दिल भी लड़ा जंग-ए-अदावत
उर्मिला माधव
24.2.2018

Friday, 22 February 2019

रात है

दर हकीक़त वक़्त भी पाबंदियों के साथ है,
दिन हुआ दिन में हमेशा,रात ही को रात है,
उर्मिला माधव...
22.2.2017..

आएगी

आँखें मेरी थक गई हैं,सर बहुत दुखने लगा,
नींद से कहना ज़रासा,इस तरफ़ भी आएगी,
उर्मिला माधव

खड़े हों

ख़ुद ही खड़े रहे हों जहां हाशिये पे लोग,
फिर और इस जगह से कहाँ जाएगा कोई
उर्मिला माधव
23.2.2018

Thursday, 21 February 2019

पाबंदियां

दर हकीक़त वक़्त भी पाबंदियों के साथ है,
दिन हुआ दिन में हमेशा,रात में ही रात है,
उर्मिला माधव...
22.2.2014...

घर जाए

दिल से हर शख्स जब उतर जाए
राबिता ......दरमियां बिखर जाए,
हक़ बुलंदी है ......सिर्फ़ ख़ामोशी,
बस .....किसी ग़ैर के न घर जाए...
उर्मिला माधव,
22.2.2016

कह दीजो

मेरी दुनियां में बहुत ग़म है, उसे कह दीजो,
हां मगर ख़ुश हूँ उसे सच न बतइयो हरगिज़..
उर्मिला माधव

Wednesday, 20 February 2019

सितम

मैंने रो-रो के उसे ख़ुद से ज़ियादा सोचा,
अपनी आंखों पे सितम ख़ूब किया रोरोके...
उर्मिला माधव

Tuesday, 19 February 2019

काफ़ी है

झुण्ड बस गीदड़ों का होता है,
शेर की एक दहाड़ काफ़ी है....
उर्मिला माधव...
20.2.2015..

हम नहीं करते

बड़े ठसके से यूँ बोले.......मुहब्बत हम नहीं करते,
तो हमने कह दिया जाओ,मियाँ हम गम नहीं करते,
उर्मिला माधव...
20.2.2016

सृष्टि में

सब परिधियाँ अर्थ अपने खो चुकी हैं सृष्टि में,
अब रहा संसार .......सो है शून्य मेरी दृष्टि में,
कौन गणनाएँ करे आघात ऑर प्रतिघात की,
चेष्टाएँ सब उपेक्षित .....पीर की अतिवृष्टि में,
उर्मिला माधव...
15.11.2016

बरमला करदे

अगर दूरी मुआफ़िक है तो दूरी बरमला करदे,
भला फिर रंज-ओ-ग़म कैसा सभी कुछ बेमज़ा करदे,

दर-ओ-दीवार की सीलन,वहीँ कुछ झांकती शाखें,
सही क्या है इमारत पर ज़रा कुछ तब्सरा करदे,
उर्मिला माधव..
20.2.2017

Monday, 18 February 2019

घर मियां

हैलो-हैलो क्यों करो.....आकर मियाँ,
है कोई रिश्ता नहीं जब......दरमियाँ,
बे-वज्ह ही चल दिए......गुफ्तार को,
जाओ तुम अपना संभालो घर मियाँ
उर्मिला माधव...
19.2.2014.

काले भी होते हैं

आने वाली ग़ज़ल का मतला---

इस दुनियां में अच्छे-अच्छे दिल वाले भी होते हैं,
उन्हें ख़बर क्या गोरे चेहरे, दिल काले भी होते हैं,
उर्मिला माधव,
19.2.2017

Sunday, 17 February 2019

गुफ़्तार में

जितने ज़्यादह पेच रख्खोगे मियाँ ....दस्तार में,
उतना ज्यादह ख़ुश्क लहजा आएगा गुफ्तार में...
++++++

jitne zydah pench rakhkhoge miyaan dastaar main,
utnaa zydah khushq lahjaa aayegaa....guftaar main...
Urmila Madhav...18.2.2017...

इजाज़त हो

अब मुहब्बत हो....या अदावत हो,
चाहे हिजरत हो ....या बग़ावत हो,
जो भी होना था हो लिया अबतक,
बस के अब ..हश्र की इजाज़त हो,
उर्मिला माधव...
18.2.2017

ग़लत बात है

इतनी मुश्किल खड़ी मत करो दोस्तो,
इक न इक दिन यहां सब बिखर जाएंगे,
ज़िन्दगी पे भरोसा ....…..ग़लत बात है,
तुम भी मर जाओगे हम भी मर जाएंगे,
उर्मिला माधव,
18.2.2018

Saturday, 16 February 2019

ज़िंदगानी के

हमारे इम्तिहां कब तक हैं वो तारीख़ बतला दो,
बहुत पर्चे कड़े रख्खे हैं तुमने ......ज़िंदगानी के,
उर्मिला माधव
17.2.2015

बांट लेती है

बड़े इक घर बना पाते हैं,पूरी ज़िंदग़ी देकर,
मगर औलाद ईंटों के भी टुकड़े बाँट लेती है....
उर्मिला माधव
++++++++
Bade ik ghar bana paate hain poori zindagi dekar,
Magar aulad। iinton ke bhi tukde baant leti hai....
Urmila Madhav
17.2.2016.

पुरवाईयां

ज़िन्दगी समझी नहीं कुछ ..वक़्त की गहराइयाँ,
और हम गिनते रहे,.....अपनी फ़क़त तन्हाईयाँ,
क़त्ल हमकोे कर दिया,मुतलक़ बिना तलवार के
ज़ह्र सी लगती रहीं यूँ......... शह्र की पुरवाइयां..
उर्मिला माधव..
17.2.2016

हुस्न ओ शबाब

अय मियाँ क्यूँ घिस रहे हो,बेवज्ह अपनी कलम,
शाइरी के वास्ते,दरकार है ......हुस्न-ओ-शबाब,
उर्मिला माधव
17.2.2017

फिर गया

मेरी सांस गो कि ठहर गई,
मेरा जिस्म टूट के गिर गया,
जो गले लगा के कही कभी,
वही बात कहके वो फिर गया
उर्मिला माधव
17.2.2018

ख़ुद के भी नहीं

अब कोई भी शख़्सियत टिकती नहीं मेयार पर
कितनी हैरत है यहां पर लोग ख़ुद के भी नहीं..
उर्मिला माधव
17.2.2018

Friday, 15 February 2019

बेबात रख्खी है

ये बिलकुल ख़ास दौलत है जो मैंने साथ रख्खी है,
इलावा इसके कुल दुनियां ..यूँ ही बेबात रख्खी है.....
उर्मिला माधव...
16.2.2015...

देखना

हर बुलंदी के सफ़र को हाशिये पर देखना,
क्यूंकि उसके बाद के सब रास्ते नीचे को हैं ....
उर्मिला माधव..
16.2.2015...

सहता है

हर इक इंसां का रब राखा,ज़माना यूँ भी कहता है,
भरोसा कर नहीं पाता, मुसलसल ग़म जो सहता है....
उर्मिला माधव...
16.2.2015...

झुक गए

Chuk gaye tum or ham bhi chuk gaye
Sab yahin aakar achanak ruk gaye,

चुक गए तुम और हम भी चुक गए,
सब यहीं आकर अचानक रुक गए,

Jo chale tan kar jahan main umr bhar,
Rasta chalte hii chalte jhuk gaye,

जो चले तन कर जहाँ में उम्र भर,
रास्ता चलते ही चलते झुक गए...
उर्मिला माधव,
16.2.2917

मांगती रहती बस

ज़िन्दगी का ख़ैरियत से वास्ता कुछ भी नहीं,
फ़िर भी दुनिया ख़ैरियत ही मांगती रहती है बस..
+++++
Zindagi ka khairiyat se wasta kuchh bhi nahin,
Phir bhi duniya khairiyat hii maangti rahti hai bas
Urmila Madhav
16.2.2018

अल्फ़ाज़ से

सोज़े ग़म हल्का नहीं होता किन्हीं अल्फ़ाज़ से,
ज़िन्दगी सच बोलती है, और हमे सहना ही है...
दर्द की बुनियाद का हिस्सा हैं गिरया और लहू,
जो भी हों हालात इनको हर तरह बहना ही है...
उर्मिला माधव
15.2.2019

सबब है

जान-ए-गुलशन तू जहाँ भर से अलग है,
तू हमारी.......…..ज़िंदगानी का सबब है.
उर्मिला माधव

Thursday, 14 February 2019

रंजिशें तमाम

उम्र भर करती रही .मैं रंजिशें तमाम,
कुछ दोस्तों ने रंगे,मुरव्वत मिटा दिया...
#उर्मिला माधव
15.2.2015...

Wednesday, 13 February 2019

तरक़ीब है

इक बहाना मिल गया बस ठीक है,
इसमें जीने की बहुत तरक़ीब है,
चंद लमहों के लिये हम सो गए,
ये महज़ इक ख़्वाब की तस्दीक़ है,
उर्मिला माधव

Tuesday, 12 February 2019

करनी है

मुझे तन्हाई की वहशत,नज़र-अंदाज़ करनी है,
भरोसा है नहीं कल का,अभी आग़ाज़ करनी है,
उर्मिला माधव ...
13.2.2014...

लूटी गईं

नए सुखनबर तीरगी के ज़ेरे साये,छुप गए,
नामचीनों को दिखाकर,.सुर्खियां लूटी गईं.....

*****
Naye sukhan var teergi ke zere saaye chhup gaye,
Naam cheenon ko dikhaa kar surkhiyan looti gayin ..
#उर्मिला माधव...
13.2.2015

घबरा गए

आँख में आंसू ......हमारे आ गए,
आज जब चलने में हम घबरा गए,
उर्मिला माधव,
13.2.2017

अलग-अलग

दो शेर अलग-अलग..

ढूंढ कर दिखलाइये अब सुर्ख़ रंगों की चमक,
इक सफ़ेदी है यहां, फिर दूर तक कुछ भी नहीं

एक ग़म से टूट  कर फिर उठ नहीं पाए कभी,
उम्र भर कोशिश रही,दुनियां को हम भी देखते..
उर्मिला माधव,
13.2.2014

Monday, 11 February 2019

क्या मुद्दआ है

किस तरह चलना है बस तुझको पता है,
अब बता क्या-क्या करें क्या मुद्दआ है ?
😊उर्मिला माधव
12.2.2018

शख़्सियत

वैलेंटाइन्स स्पेशल... 🌹🌹

Zindagi bhar jisko dar aaghosh rakhte,
Koii bhii to shakhsiyat aisii n dekhii..
*****
ज़िन्दगी भर जिसको दर आग़ोश रखते,
कोई भी तो .....शख़्सियत ऐसी न देखी..
उर्मिला माधव,
12.2.2017
#hug_day

हक़ नहीं। तुमको

अभी तो रात गुज़रने में वक़्त बाक़ी है
अभी से फ़ैसला करने का हक़ नहीं तुमको
ये मेरी रफ़्त का हिस्सा है सिर्फ़ हंस देना,
बला का हौसला करने का हक़ नहीं तुमको
उर्मिला माधव
11.2.2019

Saturday, 9 February 2019

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी थक के रुक गई होगी,
लोग समझे के मौत आ पहुंची...
उर्मिला माधव
10.२.2015

क्या है

पूरी दुनियां ही ........एक रस्ता है,
तुझको फ़िर मुझसे राबिता क्या है......
उर्मिला माधव
10.२.2015

Friday, 8 February 2019

बस गया

कौन जाने कब कहाँ से आके दिल में बस गया,
मेरे दिल की बेबसी पर खोल कर दिल हँस गया,
ऐसे महर-ए-ख़्वाब को हम देर तक सोचा किये,
ख़्वाब था या ज़हर था जो ज़िन्दगी को डस गया?
उर्मिला माधव..
9.2.2013

मंत्रणा है

प्रेम भी एक मृत्यु जैसी यंत्रणा है,
भावना की और ह्रदय की मंत्रणा है...
उर्मिला माधव...
9.2.2014

वो हिसार कहां

ज़िंदगी जिसमें बहुत देर रुका करती थी,
वो सनमख़ाने कहाँ और वो हिसार कहाँ,
उर्मिला माधव,
9.2.2017.

Thursday, 7 February 2019

चूर लग रहे थे

लोग कुछ मगरूर जैसे लग रहे थे,
खुद ही खुद में,चूर जैसे लग रहे थे
वो बहुत मीठी ज़बां सब बोलते थे,
थे वहीँ.....पर दूर जैसे लग रहे थे,
उर्मिला माधव...
8.2.2014..

सुनाई देते हैं

कौन पूछे किसीका हाल यहां,
सब तो अपनी दुहाई देते हैं,
खुलती है,जब भी आंख मुश्किल से
तंज़ गहरे सुनाई देते हैं...
उर्मिला माधव,

देखेंगे

नींद आई तो ख़्वाब देखेंगे,
जोड़ बाक़ी,हिसाब देखेंगे
कैसे ख़ुद पै हंसे कहाँ रोये,
दिन का लब्बो लुवाब देखेंगे....
#उर्मिला
8.2.2015...

देखेंगे

नींद आई तो ख़्वाब देखेंगे,
जोड़ बाक़ी,हिसाब देखेंगे
कैसे ख़ुद पै हंसे कहाँ रोये,
दिन का लब्बो लुवाब देखेंगे....
#उर्मिला
8.2.2015...

काम कर सका

दिल में उतर सका न जिगर में उतर सका,
ये तीर-ए-नीमक़श न कोई काम कर सका
उर्मिला माधव..

Wednesday, 6 February 2019

दोस्त से

बंद कर लें आस्तीनों के बटन,
जब गले मिलना हो गहरे दोस्त से...
उर्मिला माधव
6.2.2016

पीकर अपनी भांग

कुण्डलिया छंद....

क्या मतलब है आपका,जब देखो तब मांग,
विश्वनाथ सोये हुए.......पीकर अपनी भांग...
पीकर अपनी भांग उन्हें भी......चैन चाहिए,
अपनी झोली लिए हुए.......सब लौट जाइए...
जब होगा संग्राम वोट का....आना फिर सब,
समय पूर्व ही किसी बात का है क्या मतलब.....
उर्मिला माधव...
7.2.2016

Tuesday, 5 February 2019

कमाल मेरे

पंखों पै उड़ गए हैं,ख्वाब-ओ-ख़याल मेरे,
रश्कों से जुड़ गए हैं,..कितने कमाल मेरे.....
उर्मिला माधव
6.२.2015

ऊंचाई चढ़ना है

ज़रा सुनना जहाँ वालो ....हमें ऊंचाई चढ़ना है,
अगर कोई सर मुहैया हो तो हमको इत्तिला करना,
.............
Zara sunna jahan walo,Hamen oopar ko chadhana hai,
Agar koii sar muhaiya ho to hamko ittila karna..
उर्मिला माधव ..
6.2.2017

होने वाले

हम किसी तौर मुतास्सिर नहीं होने वाले,
तेरी दुनियां में अब हाज़िर नहीं होने वाले,
प्यार में शर्त है,दम-ख़म हो जिगर हो
अपना,          
कोई भी दोस्त तेरी ख़ातिर नहीं होने वाले.
उर्मिला माधव

संभाल रख्खा है

मैंने ख़ुद को संभाल रख्खा है,
दर्द ....कांधे पे डाल रख्खा है,

ग़म सभी ज़िन्दगी में पिनहां हैं,
क्या कहीं अर्ज़-ए-हाल रख्खा है?
उर्मिला माधव,

Monday, 4 February 2019

शादमां समझा किये

लोग खुद को ....शादमां समझा किये,
गो कि मुस्तक़बिल से सब अनजान थे,
उर्मिला माधव
5.२.2015....

बेख़बर

हमको दीवाना समझ कर जाने क्या-क्या कह दिया,
हम तो अपने आप में थे,बेज़ुबाँ ऑ बेख़बर
उर्मिला माधव,
5.2.2018

Sunday, 3 February 2019

मौसम हो तो ऐसा हो

जमादे रंग बस अपना...कि मौसम हो तो ऐसा हो,
हकीक़त भी लगे सपना कि मौसम हो तो ऐसा हो,
नज़र की हद तलक तो है....वसंती रंग की दुनियां,
न हो खुर्शीद में तपना....कि मौसम हो तो ऐसा हो....
उर्मिला माधव...
4.2.2014....

तितलियों के पंख

तितलियों के पंख तोड़े,.......फूल के डंठल निचोड़े,
कौन प्रिय कहकर तुम्हें,एक दीर्घ सी निःश्वास छोड़े,

सत्य की पहचान हो तो कोई भी मुंह मोड़ लेगा,
है भला एकांत तो फिर क्यों अधिक जोड़े ऑ तोड़े...
उर्मिला माधव
4.2.2015....

करते ही नहीं

हम नज़र से देख कर भी वाह करते ही नहीं,
हो रहो तुम बेवफ़ा,हम आह भरते ही नहीं,
पास आओ दूर जाओ ये मशक़्क़त तुम करो,
हम मुहब्बत की तुम्हारी चाह करते ही नहीं ...
#उर्मिलामाधव..
4.2.2016

शायद

ज़ख़्म गिनती में .....चार लगते थे,
वो भी दुनियां ही गिन सकी शायद...
उर्मिला माधव ..
4.2.2017

दुनियां

कुछ इरादे ज़िन्दगी के यूँ भी हो जाते हैं चूर
हम नहीं चाहें मगर दुनियां उड़ा देती है होश
उर्मिला माधव
4.2.2018

Friday, 1 February 2019

बचती रही

मैं ही अपना सर छुपा कर उम्र भर बचती रही,
वरना मुझ पर आपने पथ्थर उठाये थे बहुत...
::
Main hii apna sar chhupaa kar umr bhar bachti rahii,
Warna mujh par aapne,paththar uthaaye the bahut...
#उर्मिलामाधव..
2.2.2016

ख़म बहुत

जान कर उसने उठाये ग़म बहोत,
ख़ासकर हमको दिखाए ख़म बहोत,
ग़ैर की ख़िदमत में है यूँ मुब्तिला,
देख कर ये मुस्कराये,हम बहोत....
::::
Jaan kar usne uthaaye gam bahot,
Hamko jab usne dikhaye,kham bahot,
Gair ki khidmat hai yun ,mubtila,
Dekh kar ye muskaraaye ham bahot..
उर्मिला माधव
27.1.2016