Sunday, 27 January 2019

अनजान ही रहा है

मेरा सफ़र हमेशा अनजान ही रहा है,
दुश्मन भी तो हमेशा इन्सान ही रहा है,
हर गाम पै हैं साथी ये रास्ते के पत्थर,
इन पत्थरों का मुझ पर अहसान ही रहा है। 
उर्मिला माधव..
28.1.2013

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