थक के रो जाते हैं .....किरदार निभाने वाले, इस क़दर दाग़ लगाते हैं .........ज़माने वाले, करना पड़ता है कभी ज़ब्त सरे महफ़िल भी, सारे अफ़साने .........नहीं होते सुनाने वाले, उर्मिला माधव 29.2015
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