क्यूँ ज़माने की बात करते हो, बिन मुहब्बत के,रात करते हो,
रात आँखों में कल कटी मेरी, ख़त्म यूँ ही हयात करते हो, उर्मिला माधव.. 2.1.2017
No comments:
Post a Comment