जिस्म-ओ-जां मेरे रहे लो दिल तुम्हारा हो गया, बस तभी से,दिल बेचारा,ग़म का मारा हो गया, जो मुहब्बत तुमसे थी,उसका कोई सानी नहीं, मुंह घुमाकर क्या गए दिल,पारा-पारा हो गया.. उर्मिला माधव.
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