जो कोई आग हो दिल में तो उसको रंग लाने दो, हुजूम-ए-दर्द को यूँ ही कहीं ना डूब जाने दो, जो ये भरपूर साज़िश है ज़माने की ज़माने से, कभी ख़ामोश रहकर भी कोई तूफ़ान आने दो।.. उर्मिला माधव.. 31.1.2013
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