झूठ की शक़्ल ही अजब देखी, ये न बतलाएंगे ....के कब देखी, ऐसी दुनिया पे हो यकीं किसको, जो के बे नाम ....बे नसब देखी, उर्मिला माधव जनवरी 2019
No comments:
Post a Comment