मुम्बई के स्ट्रेंड सिनेमा के बस स्टॉप ओर सबीहा खड़ी-खड़ी ऊब गई थी, बस थी के आने का नाम ही नहीं ले रही था और रात गहराती जा रही थी,अब उसका दिल घबराने लगा था क्योंकि वो बहुत अच्छी तरह से जानती थी के उसकी अम्मी गेट पर ही खड़ी रहेंगी जब तक वो घर पहुंच नहीं जाती
वो ये भी जानती थी कि बहुत देर तक बस स्टेण्ड पर खड़े रहना सुरक्षित नहीं था,बहुत घबराई हुई थी क्योंकि धीरे धीरे वक़्त खिसकता ही जा रहा था उसके पास इतने पैसे भी नहीं थे जो कि वो टैक्सी पर ख़र्च कर पाती,एक छोटी सी नौकरी करती थी किसी स्कूल के दफ़्तर में स्टेनो का काम करती थी जिससे उसका और उसकी अम्मी का आसानी से गुज़र हो जाया करता था।
साधारण नाक-नक्श किंतु बहुत आकर्षक वयक्तित्व की मालकिन थी बगल से गुजरने वाला एक भी इनसान उसकी तरफ़ देखे बग़ैर नहीं जा पाता था,अब वो बहुत चिंतित हो गई थी और सोच रही थी कोई टैक्सी लेलेनी चाहिए क्या? मीटर शुरू होता था 2.25 पैसे से कोलाबा पहुंचने में अच्छा ख़ासा अमाउंट आ जाने वाला था पर मरता क्या न करता वाली कंडीशन में उसने टैक्सी लेली और घर की तरफ़ चल दी।
वो कई दिनों से नोट कर रही थी कि बस स्टैंड पर कोई लड़का उसके पीछे खड़ा रहता था और जब वो बस में बैठ जाती तब वो कहीं चला जाता था पर बहुत ज़ियादः ध्यान उसका नाहीं था उसका उस तरफ़ लेकिन आज उसको वो याद हो आया डरी हुई सहमी सी टैक्सी में बैठी हुई सोच रही थी के आज वो भी नहीं था बस स्टैंड पर और बहुत अजीब कसमसाहट जी में हो रही थी पर उसने सोचा कौन वो उसका कोई लगता था मुझे क्या पड़ी इतना सोचने की नहीं था, न सही।अब सोच रही थी पैसे कहाँ से दूंगी, ख़ैर अम्मी से पूछूँगी अंदर जाकर ,अक्सर माताओं के पास कुछ पैसे ज़रूर होते हैं और उसका घर आ गया उसने टैक्सी ड्राइवर को बिना देखे ही कहा,भैया ज़रा सा रुक जाना मैं घर से पैसे लाकर देती हूँ और घर के अंदर चली गई मां रोती हुई मिली बेटी को छाती से लिपटा लिया और भी रोने लगी सबीहा को अचानक ही ध्यान आया टैक्सी वाले का और माँ से पैसे मांगे मां ने पैसे दिए और खाना लगाने चली गईं।
सबीहा पैसे लेकर बाहर निकली तो देखा कि न तो टैक्सी थी और न टैक्सी वाला, बड़ी परेशान हो गई इधर-उधर बहुत नज़र डाली लेकिन वो तो नदारद हो चुका था। परेशान सी सोचने लगी ये क्या बात हुई वो टैक्सी लेकर बस स्टैंड पर बहुत देर से खड़ा था और मैं उसीके पास चली गई थी वो बहुत डर गई।
ख़ैर दूसरे दिन दफ़्तर गई और शाम होते ही डर गई कहीं उस टैक्सी वाले से सामना हो गया तो ?
अचानक ही वो लड़का फिर पीछे आ कर खड़ा हो गया और उसे न जाने क्यों एक राहत सी महसूस हुई ,और बस के आने पर वो बस में चढ़ी और वो हमेशा की तरह लौट गया,
एक दिन अचानक मां बोली तुम्हारे लिए लड़का देख रहे थे तुम्हारे अजमेर वाले मामू ने एक लड़का बताया था और उन्होंने उसके घर वालों को तुम्हारी तस्वीर और तुम्हारे दफ़्तर का पता ठिकाना भी दे दिया था लेकिन वो लड़का आज यहां आया था बहुत ख़ूबसूरत और अच्छे ख़ासे बड़े घर का लग रहा था,हमें लगा कि हम उसके लायक नहीं हैं क्या कहें इसको पर तुम्हारी तस्वीर लाया था और बख़ुशी तुमसे शादी करने को तैयार है शादी बहुत सादा चाहता है लेकिन ज़िद ये है कि हम भी उसके साथ रहें लेकिन हम हरगिज़ नहीं माने न मानेंगे तुम भी उसको देख लेना।।
दूसरे दिन एक सुंदर सी कार दरवाज़े पर आ कर खड़ी हुई और एक कारिंदा टाइप आदमी अंदर आया और बोला अनवर मियां आए हैं और आपसे मिलना चाहते हैं मां उठ कर गईं,सबीहा पर्दे की ओट में हो गई अनवर मियां पर नज़र पड़ते ही वो सन्न रह गई ये वही बस स्टेंड वाला लड़का था उसकी समझ में कुछ नहीं आया और घबरा कर रोने लगी।।
क्रमशः
उर्मिला माधव
Sunday, 27 January 2019
कहानी --सबीहा
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