Thursday, 17 January 2019

सोपान होते ही कहाँ हैं

कल्पनाएँ तो ह्रदय की होगयीं ऊंची गगन सी, 
वास्तविकता के सहज सोपान होते ही कहाँ हैं??
मंदिरों में देवता पर......पुष्प चढ़ते हैं सहस्त्रों,
किन्तु सब निष्प्राण है,वरदान होते ही कहाँ हैं??
उर्मिला माधव...
१८.१.२०१४...

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