Thursday, 30 November 2017

क़ता

किसी भी आस्ताने पर...जबीं झुकती नहीं मेरी,
जो ग़र कहने पे आ जाऊं ज़ुबां,रूकतीं नहीं मेरी,
न जाने क्या समझते हैं जिगर पर चोट करते हैं,
मैं क्या बेजान पत्थर हूँ,कि रग दुखती नहीं मेरी??
उर्मिला माधव...
1.12.2013

एक शेर

अब्र-ए-बहार तुझको बरसना है किस जगह,
हर दश्त में है आग .........बराबर लगी हुई
उर्मिला माधव..
1.12.2016

Tuesday, 28 November 2017

एक शेर

ऐसे भी रंग लाता है अज़मत का आफताब,
पुरज़ोर है तबस्सुम,दिल ग़म से पाश-पाश ...
#उर्मिलामाधव....
29.11.2015

क़ता

तक़ल्लुफ़ में पड़ो हो क्यों मियां........रहने भी दो जाओ,
बहे जाते है जो ख़ुद में ............उन्हें बहने भी दो जाओ,
कभी कुछ मसअले दुनियां में मुश्किल भी हैं समझे क्या ?
अगर तक़लीफ़ उनकी है ,......उन्हें सहने भी दो जाओ..
उर्मिला माधव,
29th november 2016

क़ता

मुहब्बत है हमें तुमसे,.ज़रूरत ही नहीं,नईं-नईं,
छुड़ा लेंगे तुम्हें तुमसे,..ये सूरत ही नहीं,नईं-नईं,
हमारा दिल दुखाने  में, ...ज़.माने बीत सकते हैं,
ज़रा भी ज़र्क़ आ जाए,वो मूरत ही नहीं,नईं-नईं..
उर्मिला माधव,
29.11.2016

Monday, 27 November 2017

कुछ मिसरे

होठों पे है तबस्सुम आँखों में है नमी सी,
यूँ लग रहा है जैसे शायद है कुछ कमी सी,
जज़्बात टूटते हैं,अल्फ़ाज़ रूठते हैं,
आलम तो है ख़ुशी का,क्यूँ लग रही ग़मीं सी,
शायद कि तुम नहीं हो,है साँस भी थमी सी,
आजाओ इन्तिहा है,है जान पर बनी सी....।।  उर्मिला माधव..
<3 <3

क़ता

मेरी अपनी ज़िन्दग़ी.. मेरी नज़र में ख़ूब है,
इसलिए हर रंग मेरा .....मुझसे ही मंसूब है,
ग़ैर की नज़रों में गिरना और उठना बेसबब,
कोई भी दुश्मन नहीं और नईं कोई महबूब है....
उर्मिला माधव....
उर्मिला माधव....

एक शेर

क्यूँ फ़लक पर तायरों के झुण्ड हैं?
राबितों की लाश कोई सड़ गई क्या?

उर्मिला माधव ...
28.11.2016

क़ता

आज मैं तनहा बहुत घबराई री....हे माई री,
याद मुझको इस क़दर क्यूँ आई री हे माई री?
तेरे दामन की जो यादें,छा गयीं दिल पर मेरे,
नींद बिलकुल होगई हरजाई री....हे माई  री..
उर्मिला माधव...
२८.११.२०१३.

क़ता

बरसता है जो आँखों से उसे .......सावन कहेंगे हम,
लिपटता है जो शानों से उसे .......दामन कहेंगे हम,
मुसलसल ही घिरा रहता है जिसकी याद से ये दिल,
गुज़रता है जो साँसों से उसे .......साजन कहेंगे हम.....
उर्मिला माधव,
25.11.2016..

Sunday, 26 November 2017

मतला

jab ye jaanaa tujh tak koi fariyaad nahin jaati hai,
sach batlaaun,mujhko bhi ab yaad nahin aatii hai,
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जब से जाना तुझ तक कोई फ़रियाद नहीं जाती है,
सच बतलाऊं,.मुझको भी अब...याद नहीं आती है,
#उर्मिलामाधव...
27.11.2015

क़ता

आपके लफ़्ज़ झूठे लगते हैं,
राहगीरों से .....लूटे लगते हैं,
इनमें पैगाम .कुछ नहीं होता,
सर पै पथ्थर से टूटे लगते हैं..
#उर्मिलामाधव,
27.11.2015

Saturday, 25 November 2017

तीन शेर

jalte rahne main bhi ek khaas sukun hota hai,
hum bhi ab jaanke sholon ko hawa dete hain...

hampe aansu ka bahut qarz abhi baaki hai,
isko her haal main har roz chuka dete hain..

tumko itni si bhi mushkil se bacha denge chalo,
jo bhi ilzaam hain hum khud hi laga lete hain...
Urmila Madhav
17.8.2013

शेर

आदमी अपने लिए खुद ही कफ़न बुनता है,
और मज़ा ये है .....कोई बात नहीं सुनता है.....
उर्मिला माधव....
26.11.2014...

एक मतला

हुजूम-ए-रंज की इफ़रात हुई सब्र गया,
सब्र जब टूट गया ख़्वाब तहे क़ब्र गया,
उर्मिला माधव
26.11.2016

Friday, 24 November 2017

क़ता

पुराने पन्नों से---
दिल तो ख़ुद के ही ग़म से परेशान है,
कैसे दुनियाँ के ग़म से मुख़ातिब रहे??
फ़ैसले मेरे हक़ में...सुनाता ही कौन??
मेरे दुश्मन ही सब..मेरे क़ातिब रहे।
उर्मिला माधव...
२५.११.२०१३..

क़ता

Barasta hai jo aankhon se usay saawan kahenge ham,
Lipat-taa hain jo shanon se usay daaman kahenge ham,
Musalsal hi ghira rahata hai .......jiski yaad main ye dil,
Guzarta hai jo saanson se usay ...saajan kahenge ham..
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बरसता है जो आँखों से उसे .......सावन कहेंगे हम,
लिपटता है जो शानों से उसे .......दामन कहेंगे हम,
मुसलसल ही घिरा रहता है जिसकी याद से ये दिल,
गुज़रता है जो साँसों से उसे .......साजन कहेंगे हम.....
#उर्मिलामाधव,
25.11.2015..

शेर

हक़ को हक़ मानके हक़ बोलने वाले ने यहाँ,
एक सजदे में .... .ज़मीं सर पै उठा रख्खी है,
उर्मिला माधव
25.11.2016

Thursday, 23 November 2017

शेर

कितने भंवर लपेटे,मुश्किल मैं हम खड़े हैं,
हिम्मत नहीं है जिनमें साहिल पे ही पड़े हैं,
उर्मिला माधव...
२३.११.२०१३..

Wednesday, 22 November 2017

शेर

रंज से खूंगर.........कलेजा होगया,
गो कि हर इक लफ्ज़ बेजा होगया....
उर्मिला माधव...
23.11.2014

Tuesday, 21 November 2017

एक शेर

Sare mahfil hazaaron baat kahne waale sun to le,
Fajiihat ko sanbhalun ab ke ye lahaja sambhaalun main....
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सरे महफ़िल हज़ारों बात कहने वाले सुन तो ले,
फ़जीहत को संभालूं अब के ये लहज़ा संभालूं मैं.......
उर्मिला माधव....
22.11.2014...

Monday, 20 November 2017

हिंदी मुक्तक

मृत्यु को हम क्रूर कहते......ये हमारी भूल है,
येही जीवन चक्र है तब किस तरह प्रतिकूल है??

जन्म के ही साथ मृत्यु सर्वथा निश्चित यहाँ,
सत्यता से बचके चलना हर तरह...निर्मूल है...
उर्मिला माधव...
20.11.2014...

क़ता

मुश्किल ही खड़ी करता,जाड़ों का ये मौसम,
रातें ही बड़ी करता........जाड़ों का ये मौसम,
महदूद होके घर में.......बस बैठना मुबारक,
कोहरे की झड़ी करता...जाड़ों का ये मौसम.....
उर्मिला माधव....
21.11.2014....

Sunday, 19 November 2017

एक शेर

हमको लिखना ही नहीं आता,बताओ क्यों लिखें हम ??
सबकी मर्ज़ी के मुताबिक ये बताओ...क्यों दिखें हम ??
उर्मिला माधव...
२०.११.२०१३..

शेर

ये जो बेकार सी तस्वीर सजा रख्खी है ...
ये मेरे ज़ेहन में हलचल नहीं पैदा करती

Ye jo bekar si tasvir sajaa rakkhi hai,
Ye mere zehan men halchal nahi paida karti,
उर्मिला माधव..
20.11.2016

क़ता

मनुज जब गर्वित होता है,
समय परिवर्तित होता है,

ज्ञान भी दान में नहीं मिलता,
श्रम सहित अर्जित होता है,

Saturday, 18 November 2017

शेर

पुराने पन्नों से--------
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सबकी तक़दीर सितारों से जड़ी लगती है,
अपनी सुनसान चनारों में पड़ी लगती है.......
उर्मिला माधव..
27.3.2013

क़ता

ज़िन्दगानी-ए-शरीयत.....ख़ैरियत रखती नहीं,
कौनसी हस्ती है जो कुछ क़ैफ़ियत रखती नहीं,
क्यूँ किसीको हम मसीहा मान कर सजदा करें,
हिम्मत-ए-इंन्साँ सबाब-ए- हैसियत रखती नहीं....
उर्मिला माधव
१८.११.२०१३

एक मतला

मुक़म्मल लग रहा है ये मगर जैसे अधूरा है
नहीं मुझको नहीं लगता के ये पैग़ाम पूरा है...
उर्मिला माधव....
18.11.2014...

Friday, 17 November 2017

शेर

एक पुराना मतला----
जो उल्फ़त के मद्दे नज़र आ रहे हैं,
वो दिल में हसद से ..मरे जा रहे हैं....
::
jo ulfat ke Madde nazar aa rahe hain,
wo dil main hasad se mare ja rahe hain..
#उर्मिलामाधव
18.11.2015

Thursday, 16 November 2017

Sher

Chot khaa kar bhi kambakhht ye nahi toota,
dil kisi roz hum deewar pe de maarenge...

चोट खा कर भी कमबख़्त ये नहीं टूटा,
दिल किसी रोज़ हम दीवार पे दे मारेंगे..
उर्मिला माधव

एक शेर

sach bayaani ho kisikii ,shukriya karte hain ham,
warna logon ka chalan hai,kar guzar or bhaag chal..
#उर्मिलामाधव। .
17.11.2015..

एक शेर

तग़य्युर से हूँ वाबस्ता,.....हक़ीक़त तो यही है पर,
मैं किसको साथ लाऊं अब बताओ इस गवाही में....
उर्मिला माधव..
17.11.2016
तग़य्युर... change बदलाव

क़ता

जो भाषा तुझको है आती,मुझको नहीं वो आती रे,
पावन प्रीत सहज है मुझ में मेरी यही है थाती रे,

तेरे मन में पूरी दुनियां,मेरे मन में केवल तू ,
छल प्रपंच में रचा बसा तू,मेरा नहीं संगाती रे
उर्मिला माधव..
17.11.2016

Wednesday, 15 November 2017

क़ता

जोश-ए-उल्फ़त में सू-ए-दिलबर चली जाती हूँ मैं,
कौन हूँ,क्या चाहती हूँ........कब ये बतलाती हूँ मैं,
बे-तवज्जो सा रवैय्या............बाखुदा महबूब का,
तोड़ते जाते हैं वो............और जोड़ती जाती हूँ मैं.....
उर्मिला माधव...
16.11.2014...

शेर

आज ख़मियाज़ा तेरी उल्फ़त का भी भरना पड़ा,
इस क़दर गुज़री,यक़ायक़ ज़ब्त भी करना पड़ा,
उर्मिला माधव...
16.11.2014...

Tuesday, 14 November 2017

क़ता

अजब तमाशा है आशिक़ी का,
नज़र किसीकी सनम किसीका,

ज़ुबान शीरीं,फ़रेब दिल में,
न कोई समझे है ग़म किसीका,
उर्मिला माधव

क़ता

कमज़ोर पड़ रही है,रिश्तों की पायदारी,
दुश्मन कहीं छुपा है कोई तुम में और हम में,
ये ज़िन्दगी किसीकी कब मिलकियत हुई है,
रख्खा नहीं है कुछ भी इन वादा-ऑ-कसम में,
उर्मिला माधव...
15.11.2016

Monday, 13 November 2017

चार मिसरे

ना क़ायल है सितारों की मेरे चेहरे की ताबानी,
ग़म-ए-दौराँ में भी देखो तबस्सुम मेरा लासानी,
तलातुम चाहे जैसा हो,करेगा क्या उसे फानी..?
कि जिसने डूब कर देखा हो ये दरिया-ए-तूफ़ानी.....
उर्मिला माधव.
१४.११.२०१३..

चार मिसरे

:) :) :)
---------
एक ग़ज़ल लिख्खी जो तुमने कस्टमाइज़,
बस........वहीँ से होगया क्वेश्चन अराइज़,
है बहुत मुमकिन के....हम बे-अक्ल ही हों,
तुम कहाँ साबित हुए.....कोई ख़ास वाइज़ ....!!
उर्मिला माधव...
14.11.2014...

Sunday, 12 November 2017

चार मिसरे

मेरी डायरी से-----
चढ़ते तूफ़ाँ में कभी क़श्ती उतारी होती,
ख़ूब तबियत से वहीं शाम गुज़ारी होती,
जो कहीं हद से गुज़र जाता अगर जोशे जुनूँ,
हम फ़ना होते मगर बात तुम्हारी होती..
उर्मिला माधव..
30.7.2013

एक मतला 2 शेर

जिसको देखो वो मुक़ाबिल आ गया,
मुश्किलों पर मेरा भी दिल आ गया,

मैंने सोचा हाथ से जाने भी क्यों दूं ,
इतने नेज़ों बीच बिस्मिल आ गया,

इस तखैय्युल में बुराई क्या है बोलो,
आँख बस मूंदी के साहिल आ गया,
उर्मिला माधव...
13.11.2014...

एक मतला 2 शेर

ये ज़माना और इसकी ख़ुद परस्ती,
मुख़्तसर,इनसान की औक़ात सस्ती,

हो अगर ख्वाहिश कहीं बाक़ी बक़ाया
बन तमाशाई जला के दिल की बस्ती,

भूलजा सब हम पियाला हम निवाला,
याद रख जिंदा दिली और फ़ाक़ा मस्ती,
उर्मिला माधव...
13.11.2015..

Thursday, 9 November 2017

चार मिसरे

उनसे मिलते हैंं तो ग़म और बिखर जाते हैं,
अब तो ये है के ख़यालों से भी डर जाते हैं,

कैसे हाथों की लकीरों को लिखा क़ुदरत ने,
इस पे ग़र सोच भी लेते हैं तो मर जाते हैं,
उर्मिला माधव

Wednesday, 8 November 2017

चार मिसरे

तुमने हमसे कब कहा,खुशियाँ मुबारक?
खालिक-ए-आबाद की दुनियाँ मुबारक,

वास्ते अपने फ़क़त इतना ही वाज़िब?
तालिब-ए-अहबाब की सदियाँ मुबारक?
उर्मिला माधव...
9.11.2014...

ख़ूब है

वो मेरी सूरत पे बोले ख़ूब है,
हर कोई बस हुस्न से मंसूब है,

क़द्रदां सीरत का भी है कोई तो
क्या बताऊँ,कौन वो महबूब है...
उर्मिला माधव
9.11.2016

Tuesday, 7 November 2017

हम अंधेरे में रहे

हम हमेशा दर्द के............भरपूर घेरे मैं रहे,
वो दग़ा करते रहे और.......हम अँधेरे में रहे,
उनके दिलने गैर को पुरज़ोर"सुन्दरतम"कहा,
हम ही कुछ न कह सके...बस तेरे-मेरे में रहे,
उर्मिला माधव.. ७.११.२०१३..

फ़रेब रखते हैं

वो जो चेहरे पै ज़ेब रखते हैं,
दिल में ख़ासा फ़रेब रखते हैं,

ऐसी दुनियां को क़ुफ़्र कहते हैं,
दिल में हम भी ज़रेब रखते हैं...
उर्मिला माधव...
8.11.2014...

ज़ेब--- खूबसूरती,
ज़रेब---शिकन...

संभल कर बात कर

बेखुदी के दायरों से कुछ निकल कर बात कर,
ज़ख्म बातों का नहीं भरता,संभल कर बात कर....
उर्मिला माधव...
8.11.2015

बानगी के तौर पर

Barq bhi girti rahii or toor bhi jalta rahaa,
Faisla qudrat karegii,baangii ke taur par..
::
बर्क़ भी गिरती रही और तूर भी जलता रहा,
फैसला क़ुदरत करेगी.....बानगी के तौर पर..
#उर्मिलामाधव..
8.11.2015

आवारगी एक शख़्स की

क़त्ल अपने दिल का हमने अपने हाथों कर दिया,
दिल को जब भाई नहीं,आवारगी एक शख़्स की...
उर्मिला माधव...
8.11.2016

बेचारगी एक शख़्स की

फिर पलट कर रात दिन हम,उस तरफ़ देखा किये,
फिर नहीं देखी गई .........बेचारगी एक शख़्स की...
उर्मिला माधव

Monday, 6 November 2017

दोहा

ऐसे तो सब खैरियत,फिर भी हैं बद हाल,
कब से करते आ रहे,ग़म का इस्तक़बाल.....
उर्मिला माधव...
7.11.2016..

ज़ुबाँ समझे

मुहब्बत की ज़ुबां समझे ...न धड़कन की ज़ुबां समझे,
अभी तक हम नहीं समझे,के वो समझे तो क्या समझे?
उर्मिला माधव..
7.11.2016

Saturday, 4 November 2017

था हमें मालूम

था हमें मालूम.........कोई हादसा हो जाएगा,
ये नहीं मालूम था......इतना बुरा हो जायेगा,
दिल के टुकड़े हाथ में लेकर फिरेंगे जा-ब-जा,
जो भी हम लिखेंगे वो सब,फातिहा हो जायेगा....
उर्मिला माधव...
5.11.2014...

मुंह मोड़कर

हम बुलाते रह गये वो चल दिया मुह मोड़ कर,
उसकी हरकत ने हमारा गम दोबाला कर दिया...
ःः
Ham bulaate rah gaye wo chal diya munh mod kar,
,Uski harqat ne hamara gam dobala kar diya ....
Urmila Madhav.
5.11.2016

Friday, 3 November 2017

चमन बेकार लगता है

fizaan bekaar lagti hai chaman bekaar lagta hai,
ayaadat ke hujoomon se bhi dil bezaar lagta hai..

agar kuchh raas aata hai,to ek takiya faqat bistar,
wagarna saans lena bhi bahut dushwar lagta hai..

bukhaar aaya hai kahna bhi bahut achcha nahi lekin,
dawayen dekhkar jeena bahut murdaar lagta hai..
Urmila Madhav...
4.11.2014...

जबीं झुकती नहीं मेरी

किसी भी आस्ताने पर...जबीं झुकती नहीं मेरी,
जो ग़र कहने पे आ जाऊं ज़ुबां,रूकतीं नहीं मेरी,
न जाने क्या समझते हैं जिगर पर चोट करते हैं,
मैं क्या बेजान पत्थर हूँ,कि रग दुखती नहीं मेरी??
उर्मिला माधव...
4.11.2015

भंवर लपेटे

कितने भंवर लपेटे,मुश्किल में हम खड़े हैं,
हिम्मत नहीं है जिनमें साहिल पे ही पड़े हैं,
उर्मिला माधव...
4.11.2015