Sunday, 30 June 2019

कहा ही नहीं

सच तो ये है कि सच नहीं ही कहा,
ख़ास किस्सा तो बस छुपा ही रहा,
मैंने ओलम का सिर्फ आ ही कहा,
आ से बस आग और धुंआ ही रहा.....
उर्मिला माधव...
1.7.2014...

बाक़ी हो

रुक चुकी है क्या मेरी नब्ज़-ए-हयात,
देखना छू के ज़रा,सांस कहीं बाक़ी हो...
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Ruk chukii hai  kyaa meri nabz-e-hayaat,
Dekhnaa chhuu ke zaraa,saans kahin baqi ho....
#उर्मिलामाधव...
1.7.2015...

शै ही नहीं

Qadr kitni hii karen,qadr unhen hai hii nahiin,
Unki nazaro main magar usii koii shai hii nahiin,
क़द्र कितनी ही करें क़द्र मगर है ही नहीं,
उनकी नज़रों में कहीं उनसी कोई शै ही नहीं..
उर्मिला माधव

Saturday, 29 June 2019

लड़ते हुए

कैसे इतना बोझ ढो कर आते-जाते हो कहीं?
थक नहीं जाते हो,अपने आप से लड़ते हुए ?
उर्मिला माधव,
30.6 2017

Thursday, 27 June 2019

फ़िरक़ा परस्ती

मैं तो इंसाँ हूँ,मेरे क़िरदार की हस्ती क्या है?
और तू भी इंसाँ है तो ये फ़िरक़ा परस्ती क्या है
दश्त-ए-मुश्किल पे चलो चाक़ गरेबाँ लेकर
और फिर देख तू कि प्यार की मस्ती क्या है ।।......उर्मिला माधव....

इबारत हूँ

मैं तो पत्थर पै लिखी ऐसी एक इबारत हूँ,
जिसको पढ़ने के लिए सब्र की ज़रूरत है
इसके अलफ़ाज बहुत आग सी उगलते हैं
जिसको ढकने के लिए अब्र की ज़रूरत है
उर्मिला माधव..
28.6.2013

abr----badal

समझा गए

पत्थरों के शहर में ........कहाँ आगए,
हम फ़रेब-ए-ज़माने से ......घबरा गए,
कोई दिल से मिले,....ये हुआ ही नहीं,
सब ....ज़बानी जमा-ख़र्च समझा गए।।..
उर्मिला माधव....
28.6.2015

ग़ुरूर

सच कहूँ तो ,होगया दिल 'उससे' दूर,
जिसके चेहरे पै , ..लिखा पाया गुरूर,
उर्मिला माधव...
28.6.2015...

चराग़

हमको मालूम है ..........जहां वालो,
चराग़ जलते हुए, कैसा थरथराता है..
उर्मिला माधव
28.6.2018

इंतिहा करदी

थकान ढोते हुए ..आख़री सफ़र में थे,
हमारे वक़्त ने उस पे भी इंतिहा करदी...
उर्मिला माधव
28.6.2018

बाक़ी है

ज़रा बता तो सही,कितनी सांस बाक़ी है
फ़रेब-ओ-मक्र की दुनिया में अब नहीं रहना,
उर्मिला माधव,
28.6.2018

Wednesday, 26 June 2019

देखती हूँ मैं

अजब मंज़रकशी है ज़िन्दगी ख़ालिस अदावत है,
यहां इंसां की साज़िश का तमाशा देखती हूँ मैं,
उर्मिला माधव,
27.6.2017

हम

शौक़ है तुझको बिछड़ने का बहुत,
जा ....तुझे आज़ाद कर देते हैं हम,
उर्मिला माधव
27.6.2015

Tuesday, 25 June 2019

मर्ज़ी हुज़ूर

आप मेरी ना सुनें ये आपकी मर्ज़ी हुज़ूर,
हम जो अपनी बात कहते हैं कहेंगे ही ज़रूर,
नाव कागज़ की सही पर हौसला मजबूत है,
चल दिये तो देख लेना पार उतरेंगे ज़रूर,
मुद्दतों देखा किये हैं अर्श की जानिब अबस,
रास्ते तो हैं ज़मीं पर,देखना क्या इतनी दूर ?....
उर्मिला माधव..
7.2.2013

Zindagi

जो भी हम ज़िन्दगी में करते हैं
ज़िन्दगी ख़ुद हिसाब करती है,
बोलते रहने से कुछ नहीं होता,
ये ब ख़ुद ला-जवाब करती है..
उर्मिला माधव..
26.6.2013

देखे

बा-वफ़ा देखे..बे वफ़ा देखे..,
ज़िन्दगी से सभी ख़फ़ा देखे,
कोई मन्ज़िल पे जाके भी रोया,
कोई ...राहों में फ़लसफ़ा देखे.....
उर्मिला माधव..
26.6.2014..

डरती हूँ

मैं तो एक ज़िक्र भर ही करती हूँ,
सबसे मिलने में अब भी डरती हूँ,
किस क़दर कौन क्या सुना देगा,
दिल ही दिल में बहुत सिहरती हूँ...
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main to bas zikr bhar hii kartii hun,
sabse milne main ab bhii dartii hun,
kis jagah kaun kyaa sunaa degaa,
dil hii dil main bahut sihartii hun...
उर्मिला माधव...
26.6.2014...

चाह करती हूँ

Radeef par ek koshish ....

Main bhi khushiyan ki ....chah karti hun,
Apnii janib se .................raah karti hun,
Mere hathon men kuchh nahi hai magar,
Koshishen .............be-panaah karti hun....
:::::::::
मैं भी खुशियों की चाह करती हूँ,
अपनी जानिब से,..राह करती हूँ,
मेरे हाथों में कुछ नहीं है.....मगर,
कोशिशें,.........बेपनाह करती हूँ
Urmila Madhav...
26.6.2016

दरख़्तों पर

ज़रा कुछ देर पहले ही हवा ठहरी दरख्तों पर,
मेरा एहसास अब तक भी उसीके पास बैठा है,
उर्मिला माधव

Sunday, 23 June 2019

क़श्तियाँ

देखना तूफ़ान में ये क़श्तियाँ क्यूँ जा रही हैं??
क्या कहें ज़िन्दादिली ये बेधड़क लहरा रही है!!
आज ये लगता है हिम्मत होगई चट्टान जैसी ,
क्यूँकि ये हालात से हरगिज़ नहीं घबरा रही हैं...
उर्मिला माधव..
24.6.2013

काम करदो

aaj tum apni anaa neelaam kardo,
meri khatir koi to ek kaam kardo.

Urmila Madhav..
24.5.2011

Saturday, 22 June 2019

छुप छुपा कर

ख़त तुम्हें उसने लिखे हैं छुप-छुपा कर,
आम तुमने कर दिए महफ़िल में ला कर,
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khat tumhen usne likhe hain chhup-chhupaa kar,
aam tumne kar diye...............mahfil main laa kar
उर्मिला माधव...
23.6.2014...

सुकूं के वास्ते

Hain adab ke raaste apne sukuunN ke waste,
Isliye kahte raheN,
Apne junuuN ke waaste..

हैं अदब के रास्ते,अपने सुकूं के वास्ते,
इसलिए कहते रहें अपने जुनूं के वास्ते.
उर्मिला माधव,
23.6.2017

समझते हैं

हम भी .हर इक सितम समझते हैं,
दह्र के ....पेच-ओ-ख़म समझते हैं,
ज़ुल्म कितना भी हो मगर फिर भी,
ख़ैरियत है कि …...हम समझते हैं..
उर्मिला माधव,
23.6.2017

Friday, 21 June 2019

बिखरे पन्ने

समेटा है बहुत मुश्किल से हमने....बिखरे पन्नों को,
बंधी है जिल्द अब आकर बताओ किस तरह खोलें ???
::
Sameta hai bahut mushkil se hamne,bikhre panno ko,
Bandhi hai jild ab aakar,batao kis tarah kholen....
उर्मिला माधव...
22.6.2016

वक़्त की गहराइयां

गिरहबंद क़ता...
ज़िन्दगी समझी नहीं कुछ ..वक़्त की गहराइयाँ,
और हम गिनते रहे,.....अपनी फ़क़त तन्हाईयाँ,
क़त्ल हमकोे कर दिया,मुतलक़ बिना तलवार के
ज़ह्र सी लगती रहीं यूँ.......... शह्र की पुरवाइयां..।
उर्मिला माधव..
22.6.2016

Wednesday, 19 June 2019

ख़ाब को

तैयार हो गई है मिरी आंख ख़्वाब को,
आहट बता रही है मुझे आ गए हो तुम
उर्मिला माधव
20.6.2017

गिर गए

हम तुम्हें भी चाह सकते थे हज़ारों जान से
तुम हमारे दिल से जाने कब उतर के गिर गए
उर्मिला माधव
20.6.2018

Tuesday, 18 June 2019

ईद के

ईद होने से वो पहले चाँद हो गए ईद के,
मुन्तज़िर कैसे रहेंगे लोग उनकी दीद के?
#उर्मिलामाधव...
19.6.2015

तक रहे हैं

अपनी आहें खोल के अब आसमां हम तक रहे हैं
दिल कभीका थक चुका है,पाँव भी अब थक रहे हैं...
उर्मिला माधव...
19.6.2015..

ग़म हमारा है

नहीं तुमसे कोई निस्बत,हमारा ग़म हमारा है,
चले जाओ उसी दर पै तुम्हें जो सबसे प्यारा है..
उर्मिला माधव...
19.6.2015...

मिट गया

ग़ौर से मैंने नहीं देखा तुम्हें,
और जब देखा तो सब कुछ मिट गया,
उर्मिला माधव

दर्द देदिये

दिल ने उलट-पलट के वही दर्द दे दिए,
जज़्बात मेरे हिस्से में सब सर्द दे दिए,
शादाब एक बेल थी,शादाब कब रही,
चेहरे पे जो भी रंग थे,सब ज़र्द दे दिये..
उर्मिला माधव,
19.6.2017
शादाब - हरी भरी

Monday, 17 June 2019

लाते हो

इतना घटिया सोच कहाँ से लाते हो ??
अफसानों में लोच कहाँ से लाते हो ??
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itnaa ghatiyaa soch kahaan se laate ho ??
afsaanon main loch kahaan se laate ho??
उर्मिला माधव...
18.6.2014

वर्जनाएं

जब कभी .....लांघी गई हैं वर्जनाएं,
तब सदा .....आहत हुई हैं भावनाएं,
क्या परिधियां .अर्थ अपने खो चुकीं?
बच रही बस ......चीत्कारें,गर्जनाएं...
उर्मिला माधव...
18.6.2017..

Sunday, 16 June 2019

ज़ुल्फ़ दरिया

ज़ुल्फ़,दरिया,शराब आंखें और सुराही साकिया,
इससे हट के ज़िन्दगी में और कुछ है,या नहीं ?
उर्मिला माधव,
17.6.2017

Saturday, 15 June 2019

बेकार जाओगे

मुहब्बत हो गई सच में,मियां अब हार जाओगे,
नहीं मानोगे दर तक ग़ैर के, बेकार जाओगे,

कहना क्या

तू मेरी नज़रों की तलब था ही नहीं कहना क्या ?
वरना हर ग़ाम ज़मीं,तुझको ...खुदी मिल जाती ....

too meri nazron ki talab thaa hii nahin,kahna kya ?
warna har gaam zamiiN tujhko ...khudii mil jaatii ...
उर्मिला माधव
16.6 .2017

नहीं पाई

मैं एक शब भी उसे ......भूल ही नहीं पाई,
वो मुझसे आंख चुराना नहीं भूला हरगिज़,
उर्मिला माधव

Thursday, 13 June 2019

कर लिए हैं

मुझे रुसवाइयाँ देकर बहाने कर लिए हैं,
किस जगह उसने ठिकाने कर लिए हैं ??
उर्मिला माधव..
14.6.2013

आ पहुंचे

घर से निकले,सामने देखा,और वो घर तक आ पहुँचे,
दिल पहले ही तोड़ चुके थे,आज जिगर तक आ पहुंचे...
उर्मिला माधव...
14.6.2015...

थक गए

हम वफ़ा दे-दे के बेहद थक गए,
अपने हिस्से में मगर कुछ भी न था
उर्मिला माधव

Aayaa mujhko

उम्र भर एक ही सूरत ने लुभाया मुझको,
जिससे कोई बात तक, कहना नहीं आया मुझको
Urmila madhav

Wednesday, 12 June 2019

लिखने लगे

जो हुआ करते थे उससे क्यूँ जुदा दिखने लगे?
अपनी पेशानी पै क्यूँ ये लाम-अलिफ़ लिखने लगे?
उर्मिला माधव
13.6.2013

सर बचाते हैं

Ek sher ..
Dar-o-deewar men khud khokhle,paththar lagaate hain ,
Hawa par thop kar ilzaam,apna sar bachaate hain..

दर-ओ-दीवार में ख़ुद खोखले पथ्थर लगाते हैं,
हवा पर थोप कर इलज़ाम,अपना सर बचाते हैं..
Urmila Madhav..
13.6.2017

ज़िन्दगी के ग़म

कुछ लोग डर से घर को चरागां न कर सके,
बेपर्दा हो न जाएं कहीं,ज़िन्दगी के ग़म..
उर्मिला माधव,
13.6.2018

पहचान है

दोगले रंगों की ........अपनी शान है,
बस ......यही तो आपकी पहचान है
क्यों बुरा मानो हो जब कहते हैं सब,
एक नंबर का .......ग़ज़ब बेईमान है....
उर्मिलामाधव...

Tuesday, 11 June 2019

वाक़यात

इस क़दर दिल में चुभे कुछ वाक़यात,
खोना और पाना......कोई मानी नहीं...
उर्मिला माधव

शजर देखा है

कितनी हैरत है गिरा,सब्ज़,,,,,शजर देखा है,
वक़्त-ए-मुश्किल में बहुत खूब क़हर देखा है,

चश्म-ए-गिरियाँ का अँधेरा ही रहा आठ पहर,
किस से ये कहते फ़क़त दर्द-ए-जिगर देखा है,

यूँ तो नाज़ुक था,यही कहते सुने अहले नज़र,
जम के पत्थर से लड़ा......ऐसा गुहर देखा है,

घर बहुत जलते रहे,अब्र कहीं बरसा किया,
ऐसा मंज़र भी कभी वक़्त-ए-सहर देखा है,

दिल को होता ही नहीं इसका यकीं,कैसे कहें
फिर भी ये कहते रहे लोग.....मगर देखा है,

चढ़ते दरिया में भी रफ़्तार मुक़म्मल ही रही,
हमने कश्ती को बिना खौफ़-ओ-ख़तर देखा है,
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kitnii hairat hai giraa,sabz shajar dekhaa hai,
waqt-e-mushkil main bahut khoob qahar dekhaa hai,

chashm-e-giriyaan kaa andheraa hii rahaa aath pahar,
kisse ye kahte faqat,dard-e-jigar dekhaa hai,

yun to naazuk tha,yahii kahte sune ahle nazar,
jam ke paththar se ladaa,aisa guhar dekhaa hai,

ghar bahut jalte rahe,abr kahinn barsaa kiyaa,
aisaa manzar bhii kabhii waqt-e-sahar dekhaa hai,

dil ko hotaa hii nahin iskaa yakiin kaise kahen,
phir bhi ye kahte rahe log magar dekhaa hai,

chadhte dariyaa main bhii raftaar muqammal hii rahii,
hamne qashtii ko bina khauf-o-khatar dekhaa hai....
उर्मिला माधव...
12.6.2014..

करबला सा हो गया

ये अजब एक वाक़या सा हो गया,
दर्द जब बढ़कर दवा सा हो गया,
अब अकेले हम, हमारे रात-दिन,
दिल हमारा,करबला सा हो गया,
उर्मिला माधव् ...
12.6.2015

क़ीमती कहा,

सर पर उढ़ाया शान से और ..क़ीमती कहा,
लगता था कुछ क़फ़न सा मगर चूनरी कहा,
इसको विदाई कहते हैं ....क्या ख़ूब रस्म है !!
मर्ग़-ए-बशर की रूह को .क्यूँ ज़िंदगी कहा ??
उर्मिला माधव..
12.6.2017

निभाने वाले

ये दुनियां इतनी फ़रेबी क्यूं है ?
ज़िंदगी भी फ़ानी है,सब जानते हैं
तब झूठ मक्कारी,धोखेबाज़ी
इससे काम क्यों लिया जाता है
मेरे चार मिसरे
ऐसे ही हालातों में कहे गए...

थक के रो जाते हैं ...किरदार निभाने वाले,
इस क़दर ........दाग़ लगाते हैं ज़माने वाले,
करना पड़ता है कभी ज़ब्त सरे महफ़िल भी,
सारे अफ़साने ........नहीं होते,सुनाने वाले...
उर्मिला माधव,

Monday, 10 June 2019

सुकूं की बात

तू मुझको है अज़ीज़,मगर तुझको क्या ख़बर,
ये मेरा हुस्न-ए-मिजाज़ है,मेरे सुकूं की बात ...
#उर्मिलामाधव ...
11.6.2015

फ़नकरियाँ

एक शेर----

चाँद तारे और फलक,लो हो गई महफ़िल हसीन,
शब बची और हम बचे,और वक़्त की फनकारियां....
उर्मिला माधव...
11.6.2016

समझाते रहे

जाने वाले बारी-बारी छोड़ कर जाते रहे,
और जो ज़िंदा रहे वो खुद को समझाते रहे..
उर्मिला माधव..

Sunday, 9 June 2019

लत

दरीचे झांकना भी एक तरह एक लत सी होती है,
वगरना कौन क्या करता है ये मालूम ही क्यूँ हो ???
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dareeche khaaknaa bhii ek tarah ek tarah ek lat sii hotii hai,
wagarnaa kaun kyaa kartaa hai......ye maaloom hii kyun ho ??
उर्मिला माधव...
10.6.2014...

समझ

वो मेरे दर्द का .....हर रंग समझ लेता है,
इतनी ख़ामोश वफ़ा,मुझको रुला देती है....
उर्मिला माधव..
10.6.2015

ढकने को

हमको आदत है हमेशा से बहुत हंसने की,
अच्छा पर्दा है,सभी दर्द-ओ-अलम ढकने को...
उर्मिला माधव
10.6.2015

युग पुरुष 😊😊

या लिखे गाली कभी और या लिखे लफ़्फ़ज़ियाँ,
और मुहब्बत में लगाए ....कैसी-कैसी बाज़ियाँ,
उसपै ये दावा ..कभी वो राम या फिर कृष्ण है,
टेढ़ी-मेढ़ी हो गईं सब .....उसकी तीरन्दाज़ियाँ...
आज का ये युग पुरुष है...
उर्मिला माधव...
10.6.2015..

पशेमाँ होगया

किस अक़ीदत से लिखे ....जज़्बात कुछ
वो नहीं समझे,हमारा दिल पशेमां होगया..
#उर्मिलामाधव...
10.6.2015

चलें

कितनी ऊँचाई पै जाकर,आएंगे नीचे को हम,
सोच लें जाने से पहले,....हौसला करके चलें...
उर्मिलामाधव...
10.6.2016

Saturday, 8 June 2019

हटाओ चिलमन

हटाओ चिलमन इधर तो आओ मिलाओ नज़रें कि हम खड़े हैं,
अगर मुहब्बत है तुमको हमसे,तो तुम बड़े हो कि हम बड़े हैं??
क्या ये सही है दरूँ तआल्लुक़ ये सिलसिला भी दर पेश आए??
कि हर जमाल-ओ-अना से लड़के तुम्हारी दहलीज़ पै हम चढ़े हैं..
उर्मिला माधव
9.6.2013

कहानी है

बहुत मासूम चेहरों की....बड़ी लम्बी कहानी है,
कभी सहमा सा भोलापन,कभी रोती जवानी है
हज़ारों ग़ाम पीछे लौट कर..जब भी ज़रा देखा,
उसी मासूमियत के हाथ......कोरी नातवानी है....
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bahut maasoom chehron kii,badi lambii kahaanii hai,
kabhii sahmaa huaa bachpan,kabhii rotii jawaanii hai,
hazaaron ghaam peechhe laut kar jab bhii zaraa dekhaa,
usii maasoomiyat ke haath korii naatwaanii hai ....
उर्मिला माधव ...
9.6.2017....

सालों में आए

बड़ी मिन्नतों से तो सालों में आये,
यही बात हर दम ख़यालों में आये,
बहुत आरज़ू जिनके दीदार की थी,
वो आये मगर,हंसने वालों में आये,
उर्मिला माधव,
9.6.2017

कारवां के साथ

कारवां के साथ में चलते रहे सब उम्र भर,
जो मगर तन्हा चला, परचम उसी के हाथ था..
उर्मिला माधव..
9.6.2017

Friday, 7 June 2019

हो गईं

फ़ासले जो आज़्म्तर हैं,......तेरे मेरे दरमियाँ,
जो तेरी ख्वाहिश बहुत थी वो मुक़म्मल हो गई
#उर्मिलामाधव ....
8.6.2015

फ़ोटो नया

रोज़ फ़ोटो .......नया लगाना है,
याद करना है,.....याद आना है,
वक़्त को वक़्त कब है भैय्या जी,
ज्यों ही बीता के ..दिन पुराना है..
उर्मिला माधव ...
8.6.2016

तो मैं जानूँ

डूबते सूरज की समझे नातवानी तो मैं जानूँ,
और अपनी छोड़ दे ये हुक्मरानी तो मैं जानूँ

बादशाहत के नशे में चल रहा है झूम कर तू,
बिन नशे के जी ज़रा ये ज़िंदगानी तो मैं जानूँ,

हो गए गद्दीनशीं तो मार दी दुनियां को ठोकर,
सरहदों पर झोंक दे अपनी जवानी तो मैं जानूँ,

ग़ैर मुल्कों में उड़ी हैं धज्जियाँ अपने वतन की,
चिंदियों पर लिख कोई अच्छी कहानी तो मैं जानूँ

ख़्वाब देना आसमां के,कौनसी खूबी है इसमें,
दे ज़रा अपने वतन को कुछ निशानी तो मैं जानूँ,
उर्मिला माधव...
14.5.2015...

अच्छा नहीं है

उस के आगे कोई भी अच्छा नहीं है,
आपने दिलबर मेरा देखा नहीं है,
उर्मिला माधव

निकलते हैं

Ishq men raat bhar hi jagte hain,
Din men taare kahan nikalte hain?

इश्क़ में रात भर ही जगते हैं,
दिन में तारे कहाँ निकलते हैं ☺️
उर्मिला माधव..
8.6.2017

Thursday, 6 June 2019

चलने लगें

हम चलें और तुम चलो और साथ सब चलने लगें,
वक़्त से पहले ही नाहक़ हाथ क्यूँ मलने लगें ??
रास्ता मुश्किल तो है पर जायेंगे हम हश्र तक,
बे-सबब ही मंजिलों से पहले क्यूँ ढलने लगें ??
उर्मिला माधव..
7.6.2013

इत्तिला

रेल की सीटी सुनी तो दिल धड़क कर थम गया,
ये जुदाई की सदा थी और ग़मों की इत्तिला....
उर्मिला माधव
7.6.2015..

बिसात

कमल मुख पर .आपके....स्पष्ट है विश्वास घात,
डाली-डाली आपकी तो अपने हैं सब पात-पात,
आप जैसा कर रहे हैं,....वैसा ही स्वीकृत भी हो,
है यही निर्णय उचित तो बिछ गई अपनी बिसात,
उर्मिला माधव,
7.7.2017

न आई है

क्या कहें किसपे जां गंवाई है,
उम्र भर नींद ही न आई है
उर्मिला माधव

Wednesday, 5 June 2019

कुंडलिया छंद

हिंदी में कृपया लिखें मित्र Sunaharilal,
रोमन में लिख्खा हुआ पढ़ना लगे वबाल,
पढ़ना लगे वबाल,..पृथक लगती है बानी,
नीना को जल्दी बाज़ी में .....पढ़लें नानी,
कहें उर्मिल कविराय समझ नहीं आएं बिंदी,
उच्च कोटि की भाषा लगती अपनी हिंदी....
#उर्मिलामाधव..
6.6.2015..

दूरियां

खिड़कियों से नापते हैं दूरियां
जाने किन क़दमों को आना है यहां..
उर्मिला माधव
6.6.2018

Monday, 3 June 2019

अजीब रहते हैं

बड़े ही फ़ख़्र से ख़ुद को अदीब कहते हैं,
सुलूक उनके मगर कुछ अजीब रहते हैं,

जारी हुआ

दिल की जानिब से सितम जारी हुआ,
आपसे मिलना बहुत भारी हुआ,
यूँ भी तो मुश्किल थी अपनी ज़िंदगी,
फ़िर इज़ाफ़ी रंज क्यूं तारी हुआ,
उर्मिला माधव
4.6.2018

जारी हुआ

दिल की जानिब से सितम जारी हुआ,
आपसे मिलना बहुत भारी हुआ,
यूँ भी तो मुश्किल थी अपनी ज़िंदगी,
फ़िर इज़ाफ़ी रंज क्यूं तारी हुआ,
उर्मिला माधव
4.6.2018

Saturday, 1 June 2019

मुहाल है

ग़म की सियाह रात है जीना मुहाल है,
क्यूँ मुख़्तलिफ़ है इम्तिहाँ अब ये सवाल है?
तनहाइयों से लड़के ग़ुज़ारी है ज़िन्दगी,
अब तक भी हाथ ख़ाली हैं इसका मलाल है।
उर्मिला माधव.
7.3.2o13

क़द्र

Jab tumhaare the kabhii qadr nahin kii tumne'
Aaj kahte ho hamen rang badal uthte ham.....??
***************************************
जब तुम्हारे थे कभी क़द्र नहीं की तुमने,
आज कहते हो हमें ..रंग बदल उट्ठे हम..!!!
#उर्मिलामाध.....
2.6.2015..

क्या क्या हैं

हमारे ग़म को यूँ ही हंस के देखने वाले,
तुझे ख़बर ही नहीं,ग़म के रंग क्या-क्या हैं,
::
Hamare gm ko yun hi hans ke dekhne waale,
Tujhe khabar hi nahin gm ke rang kya-kya hain....
Urmila Madhav...
2.6.2016

क्या करूँ मैं

Jisko dekho,dushmani ke rang me hai,
Zindagi tu hi batade kya karun main,
Urmila.Madhav

जाना जाए

क्या ज़रूरी है, किसी और से जाना जाए,
मुझको हर बार मिरे तौर से जाना जाए,
उर्मिला माधव
2.6.2018

फ़क़त

सुकून तुमको मिलेगा तो एक जां से फ़क़त,
ज़माने भर की तुम्हें जिसने शक़्ल दिखलाई
उर्मिला माधव
2.6.2018