आने लगीं समझ में मुझे ....जब बुराइयां,
तब ठीक ही लगी हैं मुझे ...सब जुदाइयाँ
घेरे में साज़िशों के .जिया वक़्त को बहुत,
पर दी हैं ज़िन्दगी को कहाँ कब सफाइयां
उर्मिला माधव..
1.8.2016
Monday, 30 July 2018
बुराइयां
क़ातिबे तक़दीर
क्या परस्तारी मुहब्बत की मज़ा देगी तुझे,
देखले होकर मुसाहिब क़ातिबे तकदीर का....
उर्मिला माधव...
30.7.2014..
कुछ शेर
ग़र समझना चाहते हो तुम कभी मेरा वजूद,
उम्र भर को माँग की सुर्ख़ी मिटा कर देखना...
एक से बढ़कर एक तीरंदाज़ थे,
मक़बरे सारे उलट कर देख ले..
सर तो हो लेकिन नहीं हो सर परस्त,
उस घड़ी तुम ज़िन्दगी को आज़माना..
इस क़दर रोते हुए वो फिर रहा था दर-ब-दर,
पाक़-ओ-ताहिर रूह वाले लोग बाहर आ गए...
क्यूँ कोई क़िस्सा करे,ग़म के मुतल्लिक जा-ब-जा ,
ज़ेहन-ओ-दिल इनसान के अब बर्फ़ के घर हो गए,
हाथ से चेहरे को ढक कर उसने देखा आइना,
फिर भी ग़म्माज़ी तो उंगली के झरोखे कर गए,
मिल ही जाते हैं दुनियां में,कभी कहीं कुछ प्यारे लोग,
ख़्वाबों की बुनियाद के अब भी, होते हैं रखवारे लोग,
जिस पे ज़ाहिर हैं ,ख़राबात तिरी दुनिया के,
उसको अब हश्र में जाने की ज़रूरत क्या है...
मेरी वफ़ा की शक़्ल ....बिगाड़ी है दह्र ने,
वरना मिरे मिजाज़ में तल्ख़ी कभी न थी...
यहाँ ख़ालिस मुलम्मेदार हैं,आक़ाओं के चेहरे,
हिफाज़त इक बहाना है,असल ये नाक़ाबन्दी है,
उर्मिला माधव
30.7.2016
Saturday, 28 July 2018
मेले रहते हैं
इंसानों के घर में .......मेले रहते हैं,
दिन भर ख़ाली भूत अकेले रहते हैं...
उर्मिला माधव
वजूद
गर समझना चाहते हो तुम कभी मेरा वजूद,
उम्र भर को माँग की सुर्ख़ी मिटा कर देखना...
उर्मिला माधव...
29.7.2016
Friday, 27 July 2018
जी चाहता है
लौट जाने को जी चाहता है,
फिर न आने को जी चाहता है,
बन्द पलकों में आँसू बहुत हैं,
डूब जाने को जी चाहता है.....
#उर्मिलामाधव...
28.7.2015..
जंजीर दे दोगे
अगर तुम आ ही जाओगे तो क्या जागीर दे दोगे ??
बहुत होगा तो ये होगा........ कोई तहरीर दे दोगे,
अगर बरसात सब लिख्खी हुई तहरीर धो दे तो,
सुनहरे लफ्ज़ में लिख कर मुझे तकदीर दे दोगे ??
अगर रिश्ते निभायें उम्र भर तो साफ़ ज़ाहिर है,
हज़ारों बंदिशों में बाँध कर........ज़ंजीर दे दोगे,
उर्मिला माधव...
28.7.2014..
कहने दिया होता
मुहब्बत का ज़रा सा भी गुमां रहने दिया होता,
हमारे दिल में जो भी था हमें कहने दिया होता,
सही कहते हैं हम उनसे बहुत उम्मीद रखते थे,
कभी तो प्यार को मंझधार में बहने दिया होता....
उर्मिला माधव...
28.7.2016
निकलते रहिये
दुनियां में ग़र जीना हो तो शोलों पर भी चलते रहिये,
सूरज की मानिंद हमेशा बस हर रोज़ निकलते रहिये,
उर्मिला माधव
Thursday, 26 July 2018
Wednesday, 25 July 2018
टुकड़े वफ़ा के---
कब तलक......हम राबता नईं तोड़ते,
कब तलक......टुकड़े वफ़ा के जोड़ते,
होश तो आया.........मगर कुछ देर में,
कब तलक नईं मुंह को आख़िर मोड़ते...
उर्मिला माधव...
26.7.2014...
बर्फ़ के घर हो गए
क्यूँ कोई क़िस्सा करे,ग़म के मुतल्लिक जा-ब-जा ,
ज़ेहन-ओ-दिल इनसान के अब बर्फ़ के घर हो गए,
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Kyun koii qissa kare,gam ke mutallk jaa-b-jaa
zehn-o-dil insaan ke aab barf ke ghar ho gaye,
उर्मिला माधव...
26.7.2016
कूजागर
अब तो कोई शक़्ल देदे,ज़िन्दगी को कूजागर,
या के तेरे चाक पर ही घूमते रहना है बस?
उर्मिला माधव,
26.7.2017
अज़ल से साथ है
अय मुसाफ़िर दूर क्या जाता है तू,
ये जो दूरी है,…..अज़ल से साथ है
आंख में ...सरगर्मियां हैं अश्क़ की,
इसलिए भी कम नज़र आता है तू,
उर्मिला माधव,
26.7.2017
Tuesday, 24 July 2018
तूफ़ान है
कोई भी ग़ुज़रा नहीं है रहगुज़र सुनसान है,
वास्ते मेरे हर इक ज़र्रे में इक तूफ़ान है,
क्या कहूँ अब जा ब जा घुटने लगा है दम बहुत,
मेरे गम को देख कर वाद-ए-सवा हलकान है,
चीखती रहती है...मेरी आह मेरी रूह में,
और बाकी है कहानी ये महज़ उन्वान है,
एक पत्थर तोड़कर दिल,होगया है अब ख़ुदा,
मेरा दिल ग़ाफ़िल रहा कि वो बहुत इंसान है,
उसने तोहफ़े में दिए जो आहो नाले रंजो,ग़म,
मेरे घर में आजतक अब तक वही सामान है....
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koii bhi guzra nahin hai rahguzar sunsaan hai,
wwaste meremagar,har zarre main toofaan hai,
kya kahun ab ja-b-ja ghutne lagaa hai dum bahut,
mere gum ko dekh ka....waad-e-saba halkaan hai,
cheekhtii rahti hain.....meri aahen,meri rooh main,
or baaki hai kahaani...........ye mahaz unvaan hai,
ek paththar,tod kar dil.......hogaya hai ab khudaa,
mera dil gaafil rahaa.........ki wo bahut insaab hai,
usne tohfe main diye jo aah-o-naale ranj-o-gum,
mere ghar main aaj tak ab tak wahi saamaan hai
Urmila Madhav..
----------उर्मिला माधव------------
25.7.2014
लड़ते चले गए
सब हिम्मतों को जोड़के लड़ते चले गए,
हालात थे कि दिल के बिगड़ते चले गए,
दिल अपने रंग में था हम अपने रंग में,
दोनों ही अपनी बात पै अड़ते चले गए,
रोने से हमको उज़्र था सो रोये भी नहीं,
सबको भरम रहा के अकड़ते चले गए,
चाहत थी इब्तिदा की मगर वो नहीं हुई,
बस आख़री सिरे को, पकड़ते चले गए,
डैने कतर के हम पै ज़माना बहुत हंसा,
दुनियां के रंज हमको जकड़ते चले गए...
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sab himmaton ko jod ke ladte chale gaye,
haalaat the ki dil ke bigadte chale gaye,
dil apne rang main tha o ham apne rang main,
donon hii apnii baat pe adte chale gaye,
rone se hamko uzr thaa so roye bhii nahin,
sabko bharam rahaa ke akadte chale gaye,
chahat thi ibtidaa ki,magar wo nahin huii,
bas aakhrii sire ko pakadte chale gaye,
daine katar ke ham pe zamaana bahut hansaa,
duniyan ke ranj hamko jakadte chale gaye...
उर्मिला माधव..
25.7.2015...
बेवफ़ा रहे,
जितने क़रीबी दोस्त थे,सब बेवफ़ा रहे,
गैरों ने बढ़के मुझको सहारे बहुत दिए....
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jitne qariibii dost the ............sab be wafa rahe,
gairon ne badhke mujhko sahaare bahut diye...
#उर्मिलामाधव...
25.7.2015...
दामन जला दिया
जिनको अदू समझते रहे, साथ हो लिए
कुछ दोस्तों ने आग से दामन जला दिया,
उर्मिला माधव
25.7.2018
झरोखे कर गए
हाथ से चेहरे को ढक के ...उसने देखा आइना,
फिर भी ग़म्माज़ी तो उंगली के झरोखे कर गए,
उर्मिला माधव,
25.7.2016
Monday, 23 July 2018
मुहब्बत के चराग़
हम जलाते ही रहे दिल में मुहब्बत के चराग़,
हमपे आंधी ने सितम कब एक भी बाक़ी रखा..
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ham jalaate hii rahe dil main muhabbat ke charaagh,
hampe aandhii ne sitam kab ek bhii.baaqii ralhaa...
उर्मिला माधव...
23.7.2014...
प्यारे लोग
मिल ही जाते हैं दुनियां में,कभी कहीं कुछ प्यारे लोग,
ख़्वाबों की बुनियाद के अब भी, होते हैं रखवारे लोग,
उर्मिला माधव...
23.7.2016
Saturday, 21 July 2018
बेसाख़्ता रहे..
मेरा ख़याल-ए-यार से यूँ वास्ता रहे,
मैं उनसे मिल सकूँ कि कोई रास्ता रहे
वो हमक़दम रहें न रहें कोई ग़म नहीं
बस एक मुलाक़ात ही बेसाख्ता रहे....
उर्मिला माधव..
22.7.2013
बदलते क्यों हैं
Aap gairon ki kahi baat pe chalte kyun hain?
Log sachche hii sahi baat badalte kyun hain....
Urmila Madhav..
22.7.2014...
मेरी तन्हाई
ऐसी तन्हाई मेरे गम को बहुत रास आई,
अब फ़क़त मैं हूँ यहाँ और...मेरी तन्हाई....
उर्मिला माधव...
22.7.2014...
मुतासिर हो नहीं सकती
अगर सीरत तुम्हारी चाँद तारों सी नहीं ऐ दोस्त,
तो हुस्न-ओ-सुखन से मैं मुतास्सिर हो नहीं सकती...
Agar siirat tumhari chaand taron sii nahin ae dost,
To husn-o-sukhan se main mutassir ho nahin saktii ...
#उर्मिलामाधव..
22.7.2015..
घबरा गए?
एक ज़रा सी ....चोट से घबरा गए?
हमको देखो हम कहाँ तक आगए ,
चांदनी हर बाम पै छिटकी रही,
हम ही कसदन तीरगी में आगये,
जुम्मा-जुम्मा आठ दिन के हो मियाँ,
पथ्थरों से किसलिए टकरा गए !!!!
देख लो मुड़ने से पहले चार सू,
फिर नहीं कहना के तुम चकरा गए,
दौड़ते रहते हो बस दीवाना वार
वो झटक के ज़ुल्फ़ क्या बिखरा गए
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ek zaraa sii chot se ghabraa gaye,
hamko dekho ham kahan tak aa gaye,
chaandnii har baam pe chhitkii rahi,
ham hii kasdan tiirgii main aa gaye
jumma-jumma aath din ke ho miyaan,
paththaron se kisliye takraa gaye,
dekh lo mudne se pahle chaar suu,
phir nahin kahna ke ham chakraa gaye,
daudte rahte ho bas deewaanaa waar
wo jhatak ke zulf kya bikhraa gaye....
उर्मिला माधव...
22.7.2015...
उतर गया कोई
दिल से .......इतना उतर गया कोई,
ज़िंदग़ी भर को .......मर गया कोई,
जलती आँखों से उसको फूंक दिया,
चूँकि ........हद से गुज़र गया कोई...
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Dil se .......be-had utar gayaa koii,
Zindagii bhar ko .....mar gaya koii,
Jalti aankhon ne usko phoonk diya,
Chunki ......had se guzar gaya koii
उर्मिला माधव,
22.7.2016
Friday, 20 July 2018
कहानी सी कह रहा हो कोई
ज़िन्दगी.....इस तरह से गुजरी है
इक कहानी सी कह रहा हो कोई,
जिसमें हर एक शख़्स ..नाज़िर है,
और ...रवानी में बह रहा हो कोई....
उर्मिला माधव...
21.7.2016
Thursday, 19 July 2018
आ रहे हैं
जो उल्फ़त के मद्दे नज़र आ रहे हैं,
वो दिल में हसद से....मरे जा रहे हैं.....
उर्मिला माधव....
20.7.2014...
Wednesday, 18 July 2018
काफ़ी हैं
हम हथेली से मिलाते हैं लकीरें अपनी,
जो तेरे नाम से जुड़ती हैं वही काफ़ी हैं..
उर्मिला माधव
hum hatheli se mitaate hain lakeeren apni,
jo tere naam se judti hain wahi kaafi hain..
Urmila Madhav..
19.7.2013
Tuesday, 17 July 2018
कुड़माई ऐ
माँ ते प्यो ने रल-मिल मेरी कर दित्ती कुड़माई ए
मितर पियारे नालों तां वी ..सच्ची गल्ल लुकाई ए...
उर्मिला माधव..
18.7.2016
ख़रीदार नहीं है
जो हंसके मिल रहे हैं उन्हें प्यार नहीं है,
कोई भी उलझनों का ख़रीदार नहीं है.....
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jo hanske mil rahe hain,unhen pyaar nahin hai,
koii bhii uljhanon ka khariidaar nahin hai...
उर्मिला माधव...
18.7.2014..
जोश में आ कर
मुहब्बत हो गई उनको वो बोले,जोश में आकर,
तो उसके आगे बोलेंगे,किसी आगोश में आकर,
ज़ेह्न बे होश था उस पर जुनून-ए-जाम भी तारी,
वफ़ा करना भी सीखेंगे,यों बोले होश में आकर..
उर्मिला माधव..
18.7.2016..
ज़रूरत क्या है
जिस पे ज़ाहिर हैं ,ख़राबात तिरी दुनिया के,
उसको अब हश्र में जाने की ज़रूरत क्या है....
उर्मिला माधव....
18.7.2016
Monday, 16 July 2018
नज़र आते हैं
एक चेहरे में बहुत चेहरे नज़र आते हैं,
ये समझते ही,ख़यालात बिखर जाते हैं,
चाहे ज़ाहिद हों,बिरहमन हों,एक जैसे हैं
ऐसे रंगों में,सभी दिल से उतर जाते हैं..
उर्मिला माधव..
17.7.2013
जदीद शक़्ल
हमको फ़ना समझ के बहुत खुश वो हो गए,
ज़ाहिर हुई न जिनको, .हमारी जदीद शक़्ल..
उर्मिला माधव,
17.7.2017
जदीद .. नई (नया हाल)
Sunday, 15 July 2018
ईद मुबारक
दुनियां के हर इंसान को हो ईद मुबारक़,
जो जिसके साथ हो वो उसे दीद मुबारक,
मफ़हूम मेरी बात का इतना ही है जनाब,
जो की गई हो दिल से वो तनक़ीद मुबारक़....
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duniyaan ke har insaan ko ho iid mubaaraq,
jo jiske saath ho......wo use deed mubaaraq,
mafhoom merii baat ka...itnaa hii hai janaab,
jo kii gaii ho dil se ......wo tanqiid mubaaraq...
उर्मिला माधव
ईद के
ईद होने से वो पहले चाँद हो गए ईद के,
मुन्तज़िर कैसे रहेंगे लोग उनकी दीद के?
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Eid hone se wo pahle,chaand hogaye eid ke,
Muntzir kaise rahenge log unkii deed ke,.
#उर्मिलामाधव...
16.7.2015
कभी न थी
मेरी वफ़ा की शक़्ल ....बिगाड़ी है दह्र ने,
वरना मिरे मिजाज़ में तल्ख़ी कभी न थी...
::
Meri wafa kii shaql bigaadi hai dahr ne,
Warna mire mijaz men talkhi kabhi n thii ...
Urmila Madhav...
16.7.2016
ज़िंदाबाद क्या ?
जब इन्क़लाब ही नहीं तो ज़िन्दाबाद क्या ?
हासिल न हों नतीजे तो फ़िर ज़िहाद क्या?
रस्ता ही भूल बैठे ज़ाहिद हो या बिरहमन,
मंज़िल तो एक ही है तो फ़िर फ़साद क्या ?
उर्मिला माधव..
16.7.2017
Saturday, 14 July 2018
सरमाया करके आ गए
bhiid men ek majmuaa ham shaya karke aa gaye,
jaane kyun aisaa lagaa sab zaayaa karke aa gaye,
dil hii dil men hamko ye mahsoos sa hotaa rahaa
kharch bas alfaaz ka sarmaayaa karke aa gaye,
सच्चे नईं होते
दो चेहरे, चेहरे पे ......अच्छे नईं होते,
दूजे भी आकिल हैं, ...बच्चे नईं होते
काले दिल ऑ सोच फ़रेबी वा जी वा
ज़ाहिर है वो इंसां ….…सच्चे नईं होते,
उर्मिला माधव,
15.7.2017
Friday, 13 July 2018
इबादत कीजिये
अच्छा हम चलते हैं हमको अब इजाज़त दीजिये,
प्यार जिससे मिल सके उसकी हिफाज़त कीजिये,
कुछ मुलाकातों के ज़रिये बांटिये..आपस के गम,
सारी दुनिया के लिए....दिल से इबादत कीजिये,
उर्मिला माधव...
14.7.2014..
इतिहास की लकीरें
चेहरे पै खिंच गईं हैं,इतिहास की लकीरें,
कब तब छुपी रहेंगी, एहसास की लकीरें,
ज़ाहिर नहीं था करना,ये फिर भी हो गया है,
आँखों से हैं नुमायाँ,कुछ प्यास की लकीरें...
साँसों का आना-जाना,मुश्किल हुआ यक़ीनन,
हर दम बिखर रही हैं,अब आस की लकीरें..
#उर्मिलामाधव...
14.7.2015
दूर हो गए
बस आईने में उसके,उतरने की फ़िक्र में,
दुनियाँ की हर खुशी से बहुत दूर हो गए...
#उर्मिलामाधव...
14.4.2015
Thursday, 12 July 2018
ख़ुदाई का नाम है
बाक़ी की ज़ीस्त तुमसे जुदाई का नाम है,
तन्हाइयों का, ग़म का, ख़ुदाई का नाम है..
:::::::
baki ki zeest tumse judayi ke naam hai,
tanhaiyon ka ,ghum ka ,khudayi ka naam hai,
उर्मिला माधव..
13.7.2017
Wednesday, 11 July 2018
हौसला करके दिखाओ
रहबरों मेरे वतन के हौसला करके दिखाओ,
जो ज़मीनों में उगाते हैं गुहर उनको मनाओ,
धज्जियाँ सारे दहर में उड़ गईं अपने वतन की,
टूटती बुनियाद को तुम ख़ुशनुमाँ करके दिखाओ.
उर्मिला माधव..
12.7.2013
घर हो गया..
एक खता क्या होगई दिल दर्द का घर हो गया,
टूट ही जाता मगर ये जम के पत्थर हो गया,
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ek khtaa kya hogaii dil dard ka ghar hogaya,
toot bhii jaataa magar ye jam ke paththar hogayaa
उर्मिला माधव...
12.7.2014
Tuesday, 10 July 2018
नस्ल का
जिसको है चस्का शराब-ए-वस्ल का,
वो मज़ा क्या पाएगा दरअस्ल का ?
कितनी शिद्दत है किसीकी चाह में
इम्तिहाँ हो आदमी की नस्ल का......
उर्मिला माधव....
रोते हुए हालों में
अनजान ख़यालों में,गुज़रे हुए सालों में,
सुनसान उजालों मे,हर रात सवालों में,
एक साया उभरता है वो बात भी करता है,
शामिल सा ही लगता है,रोते हुए हालों में..
उर्मिला माधव..
11.7.2013
Monday, 9 July 2018
बातूनों को
जो कनीज़ समझा करते हैं खातूनों को,
जी करता है....होश दिला दें बातूनों को,
उर्मिला माधव...
10.7.2014..
Sunday, 8 July 2018
Saturday, 7 July 2018
गुलाबों सी
देखो लड़की है इक गुलाबों सी,
इसकी आँखें हैं जैसे ख़ाबों सी,
इसको मालूम है नहीं कुछ भी,
दुनियांदारी है बस सराबों सी ...
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dekho ladkii hai ik gulaabon sii,
iskii aankhen hain jaise khaaon sii,
isko maaloom hai nahin kuchh bhii,
duniyaan daarii hai bas saraabon sii...
उर्मिला माधव...
7.7.2014...
रखता था
hath men ek ..............rumaal rakhta tha,
usmen kuchh khat sambhaal rakhta tha,
apni palken ...........kabhi khuli na rakhin,
in men ............aansu bahaal rakhta tha,
Pranav Chakrvarti...
प्रणव
मैं गुरूर अपनी मुहब्बत पे बहुत रखता हूँ,
उसका,मस्नूई से चेहरों से,अलग चेहरा है,
मैं किसी गैर का तालिब ही नहीं हूँ हरगिज़,
यूँ भी वाकिफ़ हूँ ज़माना ये बहुत बहरा है,
प्रणव
मस्नूई--- बनावटी,नक़ली
चाहता है
Kyun usika ....dil dukhana chahta hai,
jisko ik arse se ....paanaa chahta hai.
uski aankhon men likhi hai,jo haqiqat.
apne hathon se ....mitana chahta hai....
Pranav .....
सजाया जाए
वक़्त आ जाए तो तक़लीफ़ न हो गिनने में
दिल के ज़ख्मों को करीने से सजाया जाए....
उर्मिला माधव...
8.7.2015
ज़र्क़ दिल पर
ज़र्क दिल पर,दिमाग़ पर भी है,
अर्क आँखों का राख पर भी है,
कोई शिकवा नहीं मगर इसमें,
फ़र्क इज़्ज़त पै साख पर भी है,
उर्मिला माधव...
8.7.2015
गहराइयाँ
गिरहबंद क़ता...
ज़िन्दगी समझी नहीं कुछ ..वक़्त की गहराइयाँ,
और हम गिनते रहे,.....अपनी फ़क़त तन्हाईयाँ,
क़त्ल हमकोे कर दिया,मुतलक़ बिना तलवार के
ज़ह्र सी लगती रहीं यूँ........ शह्र की पुरवाइयां..।
उर्मिला माधव..
8.7.2015
Thursday, 5 July 2018
रहगुज़र पे हम
जब तक भी हो सका था,बहुत दूर तक चले,
अब थक के रुक गए हैं, किसी रहगुज़र पै हम ,
#उर्मिलामाधव...
6.7.2015
शहीद होती है
जब मुहब्बत .....शदीद होती है,
तब ही आशिक़ की ईद होती है,
कोई भी .....बेवफ़ा अगर होगा,
जम के ......मट्टी पलीद होती है...
उर्मिला माधव,
6.7.2016
ईद की
gam ke manzar har taraf chhaye hue hain,
sab ke sab chehre to murjhaaye hue hain,
Kya mubarakbaad den ham ......Eid kii
sach to ye hai,ham bhii ghabraye hue hain...
:: :: :: ::
ग़म के मंज़र हर तरफ़ छाये हुए हैं.
सब के सब चेहरे तो मुरझाये हुए हैं ,
क्या मुबारकबाद दें हम .....ईद की
सच तो ये है हम भी घबराए हुए हैं......
उर्मिला माधव...
6.7.2016
धुआं धुंआं
बुझती है अगर आग तो अन्दर धुंआ-धुंआ,
बरहम है ग़र नज़र तो है मंज़र धुंआ-धुंआ,
उर्मिला माधव...
5.7.2014..
ख़ब्त में पला है
जो ख़ब्त में पला है उसे कुछ खबर नहीं,
ऐसे जुनूनी शख्स की हरगिज़ सहर नहीं,
उर्मिला माधव...
ज़िंदगी की राहें
क्यूं वज़्न-ए-ज़िंदगानी,उठता नहीं है आख़िर,
क्या पाँव थक गए हैं या ज़िन्दगी की राहें ?
उर्मिला माधव..
5.7.2017
Tuesday, 3 July 2018
आब-ए-हयात रख लूँ
इंसाँ की ज़िन्दगी भी हर ग़ाम इम्तिहाँ है,
तौफ़ीक़ मुझको देदे आब-ए-हयात रखलूँ,
कैसी भी रहगुज़र हो,रफ्तार हो मुक़म्मल,
महफ़िल में आलिमों की अपनी बिसात रखलूँ
उर्मिला माधव
4.7.2013
ghaam---qadam
taufeeq-----shakti..
aab-e-hayat---zindagi ka paani,yani izzat..
rahguzar----raasta
muqammal---atal..
aalim----vidwaan
आ रहे हैं
खोल कर बाब-ए-दबिसतां उम्र भर देखा किये,
जाने वाला कह गया था ....आ रहे हैं लौट कर
,
Khol kar baab-e-dabistaan umr bhar dekha kiye,
Jaane waala kah gaya tha,aa rahe hain laut kar..
उर्मिला माधव,
4.7.2017
बाब-ए-दबिसतां--- घर का दरवाज़ा
हो ही गया
ज़ाहिराना तौर पर,.............उसने मुहब्बत ख़ूब की
फ़िर भी अहसास-ए-तग़ाफ़ुल,ख़ुद-ब-ख़ुद हो ही गया..
उर्मिला माधव,
4.7.2017
सर टिका कर
बरसात का वो मंज़र,......किस दर्ज़ा ख़ूबरु था,
शब भर खड़े रहे हम.खिड़की पै सर टिका कर....
----------------------------------------------------
barsaat ka wo manzar .....kis darzaa khubruu thaa,
shab bhar khade rahe ham khidkii pe sar tikaa kar...
उर्मिला माधव...
4.7.2017
Monday, 2 July 2018
ग़र्क़ कर दिए
अख़्लाक़ के तरीके सभी ग़र्क़ कर दिए,
जितने थे तअल्लुक़ सभी तर्क़ कर दिए,
ख़ामोश हूँ बहुत कि अभी ऐतक़ाफ़ है,
दर्द-ए-मरासिम भी तहे बर्क़ कर दिए..
उर्मिला माधव..
3.7.2013
ठूंठ पर बैठे
किस चमन की खूबियाँ गिनवा रहे हो ??
ठूंठ पर........बैठे नज़र क्यूँ आ रहे हो ??
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kis chaman kii khoobiyaan ginwaa rahe ho ??
thoonth par baithe nazar kyun aa rahe ho ??
उर्मिला माधव...
3.7.2014...
ग़लत क्या है
Usko maaloom hai,galat kya hai,
Aisii harqat kii .maazrat kya hai,
Dil pe ...kya naagawaar guzrega,
Uspe gairon kii manqbat kya hai...
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उसको मालूम है,..ग़लत क्या है,
ऐसी हरक़त की माज़रत क्या है
दिल पै ....क्या नागवार गुज़रेगा
उसपै ..गैरों की मनक़बत क्या है
#उर्मिलामाधव...
3.6.2015
सांस साथ रहती है
मेरी हर सांस तेरे साथ-साथ रहती है,
ये अलग बात है बस दूर से देखूं हूँ तुझे...
#उर्मिलामाधव...
7.2015
साया भी न हो
तेरी दुनियां के हर इक दोस्त को ताक़ीद रहे,
तेरे क़रीब किसी ग़ैर का .…..साया भी न हो....
#उर्मिलामाधव ...
3.7.2015
Sunday, 1 July 2018
शाइर
मैं तो शाइर हूँ..........चली आती हूँ,
अदबी दुनियां के सिलसिले के तह्त,
घूमना-फिरना .....इक शगल है मेरा,
यूँ न समझें ......किसी गिले के तह्त..
उर्मिला माधव..
2.7.2916