टूटते रिश्तों को फिर-फिर जोड़ने जाते रहे, और ख़ाली हाथ ही घर लौट कर आते रहे, इन्तिहाई कोशिशों का सिर्फ़ ये जलवा रहा, बेवफ़ाई उनकी ठहरी, हम सज़ा पाते रहे।..Urmila Madhav 21.4.2013
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