कहीं मेघ मल्हार सा राग बजे,कहीं वायु चले हलकी-हलकी, हिय पीर उठे,नहीं धीर धरे,कहां बात कहूँ सखि उस पल की, मन पावन प्रेम के रंग रंगा,और तान बजे मुरली की कहीं, हिय पीर उठे,नहीं धीर धरे,और आँख पड़े छलकी-छलकी, #उर्मिलामाधव.... 14.4.2015..
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