क्या करूँ मैं ज़िन्दगी में ज़िक्र ला-परवाही का, दिल किन्हीं रंगीनियों से पुरअसर होता नहीं,
जिसको देखो दौड़ता फिरता है अपने ढंग से, मरहलों का रास्ता पर मुख़्तसर होता नहीं, उर्मिला माधव ... 14.4.2015
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