लोग गफ़लत में बहुत उम्र बिता देते हैं,
अपने जज़्बों को बहुत ख़ूब सज़ा देते हैं,
हमसे दिलदार ही दुनियां में धुआं होके भी,
खाक़ लेते हैं ज़मीं पर से, उड़ा देते हैं,
ग़म ख़ुशी,मौत दुआ और हजारों मसले,
कुछ भी लिखते हैं हथेली पै,मिटा देते हैं,
बात का रंग,ज़ुबां शीरीं,शहद के माफ़िक,
अपने लफ़्ज़ों में मिला कर ही दुआ देते हैं,
वक़्त आता है जबीं छू के निकल जाता है,
हम ज़माने को फ़क़त हंस के दिखा देते हैं,
#उर्मिलामाधव ...
1.4.2015...
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