ये मेरे शेर और क़तआत ---
Sunday, 1 April 2018
नाज़ है
जिस मुहब्बत पर गुरूर-ओ-नाज़ है,
टूटता है रोज़ ...........ये वो साज़ है....
उर्मिला माधव....
2.4.2014..
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