Saturday, 14 April 2018

गुनगुना हम रहे हैं

वफायें ठिकाने बदल लेंगी अपने,
संभल जाओ देखो यही वक़्त है बस,
अभी तक तुम्हें गुनगुना हम रहे हैं,
वगरना ये दिल भी बहुत सख़्त है बस....
उर्मिला माधव...
15.4.2015..

No comments:

Post a Comment