Friday, 27 April 2018

क़र्ज़

पानी के एक गिलास का जो कर्ज़ हो गया,
हम उम्र भर उसी की सतह पर खड़े रहे,
ग़म में शुमार होने लगा बार-ए-ज़िन्दगी,
ज़ख्मों के नक्श थे के,ज़िबह पर अड़े रहे...
उर्मिला माधव,
28.4.2017
पानी के इक गिलास का जो क़र्ज़ हो गया
हम उम्र भर ...उसी की सतह पर खड़े रहे ....
उर्मिला माधव,
28.4.2017

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