कितने रंगों से दिल को झिंझोड़ा गया, बिखरी साँसों को रह-रहके तोडा गया, मेरी आदत यही थी तो होता भी क्या, मुझसे लिखना-लिखाना न छोड़ा गया.... उर्मिला माधव... 28.4.2014..
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