ये मेरे शेर और क़तआत ---
Sunday, 10 May 2026
थक के रो जाते हैं किरदार निभाने वाले
थक के रो जाते हैं क़िरदार निभाने वाले,
इस क़दर दाग़ लगाते हैं ज़माने वाले,
करना पड़ता है कभी ज़ब्त सरे महफ़िल भी,
सारे अफ़साने नहीं होते सुनाने वाले,
जिनको आता ही नहीं चुनना गुहर अश्कों के,
प्यार झूठा ही जताते हैं जताने वाले।।..
Urmila madhav..
11.5.2013
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